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राहुल की राय शामिल करने के लिए माथापच्ची

चालू साल (2008-0े बजट में किसानों की र्कामाफी के पैकेा में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के सुझावों को शामिल करने के लिए माथापच्ची चल रही है। यही वजह है कि आगामी जून माह तक र्कामाफी योजना को लागू करने का दावा करने के बावजूद अभी तक योजना का प्रारूप पेश नहीं किया जा सका है। वित्त मंत्रालय और कृषि मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक योजना के प्रारूप पर विचार करने के लिए सप्ताह भर के भीतर भारतीय रिार्व बैंक और नाबार्ड के साथ वित्त मंत्रालय की बैठक होने वाली है। योजना में किये जाने वाले संभावित बदलाव से र्कामाफी पैकेा की लागत मौजूदा 60,314 करोड़ रुपये के मुकाबले 65,000 करोड़ रुपये तक जा सकती है। उक्त सूत्र के मुताबिक र्का माफी पैकेा में सबसे अहम बदलाव एक सीमा तक बड़े किसानों को भी र्का माफी के दायर में लाने का है। बजट के बाद राहुल गांधी ने यही मुद्दा उठाया था। उनका कहना है कि देश के कई हिस्सों में ऐसे बड़े किसान हैं जो दो हैक्टेयर जमीन के मालिकाना हक के चलते लघु और सीमांत किसानों की परिभाषा में नहीं आते हैं। लेकिन बुंदेलखंड और विदर्भ जसे क्षेत्रों में ऐसे किसानों की आय छोटे किसानों की आय से भी कम है। इन किसानों को भी र्का माफी का फायदा मिलना चाहिए। यही वह सवाल है जिसका जवाब वित्त मंत्रालय ढ़ूंढ़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने किसानों को चार श्रेणियों में बांटा है। छोटे किसान- कम आय। छोटे किसान- उच्च आय, बड़े किसान- उच्च आय और बड़े किसान- कम आय। पहली दो श्रेणियों को र्का माफी के पैकेा का पूरा फायदा मिल जाएगा। जबकि तीसरी श्रेणी के किसानों की आय बेहतर है और वह एकमुश्त र्का निपटान सुविधा के तहत 25 फीसदी र्कामाफी हासिल कर सकते हैं। लेकिन चौथी श्रेणी के किसान सबसे कमजोर स्थिति में हैं। इनको भी र्कामाफी का फायदा मिलना चाहिए। यही वह वर्ग है जिसकी वकालत राहुल गांधी कर रहे हैं। इसके लिए जो रास्ता खोजा जा रहा है उसके तहत बड़े किसानों के मामले में र्का माफी की एक न्यूनतम राशि तय की जा सकती है। इसके साथ ही 25 फीसदी छूट की एकमुश्त निपटान योजना भी रहेगी। दोनों में से जो राशि अधिक होगी किसान उसका फायदा उठा सकता है।

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  • Web Title: राहुल की राय शामिल करने के लिए माथापच्ची