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पहले ही चुनाव के पक्ष में कांग्रेस-पीडीपी

ाम्मू कश्मीर में सत्तारूढ़ गठबंधन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही चुनाव कराना चाहता है। इसके लिए निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया गया है। लेकिन आयोग ने अभी तक इस पर अपनी हरी झंडी नहीं दी है। राज्य विधानसभा का कार्यकाल नवम्बर, 2008 के पहले सप्ताह में पूरा हो रहा है। उच्चस्थ सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और पीडीपी नेतृत्व जून या जुलाई में ही चुनाव करा लेने के पक्ष में है। इसके लिए दो ठोस कारण गिनाए गए हैं। एक है-अमरनाथ यात्रा और दूसरा है-रमजान का महीना। गठबंधन का शीर्ष नेतृत्व सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से विधानसभा का चुनाव इन दोनों आयोजनों से पहले कराने के हक में है। अमरनाथ यात्रा अगस्त में अपने पीक पर होती है। रमजान सितम्बर में पड़ता है। महा पार्टियां ही नहीं, राज्य प्रशासन भी चुनाव पहले कराने के तर्क को जायज मान रहा है। भाजपा छोड़ अन्य विपक्षी दलों को भी इस पर ज्यादा आपत्ति नहीं है। आयोग ने अभी तक जो संकेत दिए हैं, उससे लगता है कि चुनाव जुलाई और अक्तूबर के बीच हो सकेंगे। राज्य के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने पिछले सप्ताह यहां शीर्ष केंद्रीय नेताओं से मुलाकात में विधानसभा चुनाव की तैयारी पर भी चर्च की। उनके निकटस्थ सूत्रों के अनुसार स्वयं मुख्यमंत्री भी जून या जुलाई में चुनाव के पक्ष में हैं। कांग्रेस की गठबंधन सहयोगी-पीडीपी ने तो कश्मीर में बाकायदा चुनाव अभियान सा छेड़ रखा है। अगर चुनाव वाकई जून या जुलाई में न हुए तो उसे अक्तूबर महीने तक अपना टैम्पो बनाए रखने में वाकई दिक्कत होगी। यही हाल नेशनल कांफ्रेंस का है। उसका चुनाव अभियान भी तेज है।

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