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राजरंग

दूरदर्शन पर चर्चित धारावाहिक-कहां गये वे लोग की पटकथा याद आ गयी। लंबे समय तक कई कड़ियों में चले इस धारावाहिक में उन चेहरो को याद करते हुए उनकी कुर्बानियों को दर्शकों के बीच रखा गया था। आज इस धारावाहिक की पटकथा एक बार फिर से याद आ रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि हम अपने प्रदेश के उन राजनेताओं को याद कर रहे हैं, जो कभी राजनीति के खेल के मंझे खिलाड़ी हुआ करते थे। लंबे समय तक खेलनेवाले ये खिलाड़ी आज राजनीतिक परिदृश्य से गायब हो गये हैं। याद कीािये हाथी सिंह को जो उग्रवादियों के गढ़ से जीत कर आये थे। उनका नाम हाथी सिंह प्यार से पुकारा जाता था। यह इसलिए नाम पड़ा क्योंकि उन्होंने मंत्री के रूप में हाथी से मरनेवालों के परिानों को एक लाख मुआवजा का प्रावधान कराया था। एक दूसर श्रीमान राम जी के भक्त हैं। लगातार बोलने की उनकी आदत ही उनकी पहचान है। राजनीति की उलट-फेर में राजनीति के सूरमा मैदान से बाहर हैं। पता नहीं राजनीति कब करवट ले और फिर ये मुख्यधारा में आ जायें। जनता को जनार्दन बतानेवाले लोग अतीत से ही भविष्य की राह ढूंढ़ते हैं। मिल गया तो ठीक वरना इतिहास में खोकर रह जाते हैं..।

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