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बरसों बाद मिले तो छलक आईं आँखें

पाकिस्तान में करीब 20 साल से जेल में बंद सरबजीत के लिए यह गुरुवार खुशी और गम का संगम लेकर आया। हर बार टलती फाँसी और परिवार के प्रयासों को सुनकर जेल में कसमसा कर रह जाते सरबजीत ने यादों में खो गई छोटी बेटी से मुलाकात की। पत्नी की आँखों में आँसू और बहन के प्यार के प्रतीक ‘राखियों के बंडल’ने उसका स्वागत किया। इस खुशी के मौके पर भी सभी के दिल धड़क रहे थे और मन में सिर्फ यही था कि काश! इस तरह अपने देश में मिल रहे होते। काश! पाकिस्तान के राष्ट्रपति सजा माफ कर देते।ड्ढr पंजाब प्रांत के गृह मंत्रालय से अनुमति मिल जाने के बाद सरबजीत की पत्नी सुखप्रीत कौर, उसकी बेटी स्वपनदीप और पूनम, बहन दलबीर कौर और जीजा बलदेव सिंह गुरुवार शाम पाँच बजे कोट लखपत जेल पहुँचे। करीब दो घंटे चली इस मुलाकात के बाद दलबीर कौर ने वहाँ मौजूद पत्रकारों से कहा कि यह रुला देने वाली मुलाकात थी। हमने 18 साल बाद सरबजीत को देखा। बात करते हुए हम रो भी रहे थे और अंदर ही अंदर बेहद खुशी भी महसूस हो रही थी। हम लोग ऐसी परिस्थितियों में मिल रहे थे, जिसमें न तो खुशी व्यक्त की जा सकती थी और न ही दुख। छोटी बेटी पूनम ने पहली बार अपने पिता को देखा है। दलबीर का इतना कहना था कि पूनम की आँखों से आँसुओं की धारा फूट पड़ी।ड्ढr आँखों में आँसू लिए दलबीर ने लोगों और मीडिया से अपील की कि वे दोनों देशों की जेलों में बंद भारतीय और पाकिस्तानियों की रिहाई के लिए लगातार प्रयास करते रहें। जसे हम लोग सरबजीत से मिलने के लिए बेकरार थे, वैसे ही दूसर कैदी और उनके परिवारवाले मिलना चाहते होंगे। दलबीर ने कहा कि जिस परिस्थिति में मैं अपने भाई से मिली हूँ, उसमें कोई भी अपने रिश्तेदार से मिले तो उसको धक्का लगेगा। ड्ढr

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