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बिजली व नगर विकास विभाग में जंग!

ामीन निगम की, पोल बिजली विभाग का और सुविधाएं देनी हैं जनता को अब बताएं आमदनी किसकी होगी ? इसी सवाल को लेकर बिजली और नगर विकास विभाग के बीच जंग छिड़ गयी है। दोनों विभाग के अधिकारी अपने- अपने तर्को के साथ आमने-सामने हैं। बिजली विभाग का मानना है कि निगम की जमीन के एवज में उसे टैक्स दिया जाता है लिहाजा आमदनी पर हक उसका है। उधर नगर विकास विभाग इस मामले में नये नियम का हवाला देकर अपना अधिकार जताता है। टकराव की इस स्थिति में जिसकी जहां चल रही है वह विभाग वहां अपने स्तर से काम कराने पर तुला हुआ है। लिहाजा कहीं काम बाधित है तो कहीं शुरू ही नहीं हो रहा। जनता सुविधाओं से वंचित हो रही है क्योंकि जो विज्ञापन का काम देखेगा उसी के जिम्मे पोलों और स्ट्रीट लाइटों के रख-रखाव का काम भी होगा।ड्ढr ड्ढr गया में इस काम के लिए नगर निगम ने विज्ञापन प्रकाशित कराया है तो मुजफ्फरपुर में बिजली बोर्ड ने। हद तो यह है कि मुजफ्फरपुर में जिस काम के लिए बोर्ड ने विज्ञापन निकाला है उस काम को वहां के निगम ने एक वर्ष पूर्व ही एक एजेंसी को दे रखा है। एजेंसी और निगम के बीच दस वर्ष का एकरारनाम भी है। अब तिरहुत बिजली अपूर्ति एरिया, मुजफ्फरपुर के महाप्रबंधक नरन्द्र कुमार इसे गलत मानते हुए कहते हैं कि निगम को जमीन के लिए टैक्स दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए निगम को पत्र भी दिया गया है जिसका जवाब अभी प्राप्त नहीं हुआ है। उधर नगर विकास विभाग की सचिव एस जलजा बताती हैं कि नए नियम के अनुसार इस काम को निगम द्वारा ही कराया जाना है। निगम क्षेत्र की कई एजेंसियों का कहना है कि नगरपालिका अधिनियम 2007 के अनुसार निगम को ही यह काम कराना है। मुजफ्फरपुर में काम कर रही एजेन्सी के दावे के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में निगम के पक्ष में एक फैसला दिया है।ं

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