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बिहार के पसीने ने फिर अपनी माटी का रुख किया

आ जा उमर बहुत है छोटी .. अपने घर में भी है रोटी..की चिठ्ठी आई है..। बिहार में विकास की इस पुकार ने दूसर राज्यों में रोटी की तलाश में जा रहे मजदूरों का रुख मोड़ दिया है! महाराष्ट्र जैसी घटनाएं और बिहार में निर्माण कार्यो की आई बाढ़ को भी इसका बड़ा कारण माना जा रहा है। पलायन के इस बदले फामरूले ने बिहारी मजदूरों पर निर्भर पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों की नींद उड़ा दी है। जिनके बूते उनकी खेती और उद्योग चमक रहे थे उन्होंने बिहार का रुख करना शुरू कर दिया है। गुजरात जैसे राज्य भी इससे परशान हैं।ड्ढr ड्ढr इसका ही असर है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरन्द्र मोदी को बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी से यह अनुरोध करना पड़ा कि वे बिहारी मजदूरों से गुजरात वापस लौटने को कहें। मोटे तौर पर अन्य राज्यों में करीब 60 लाख बिहारी विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनमें से आधे भी लौट आए तो दूसर राज्यों की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। एक आकलन के मुताबिक होली पर अपने घर लौटे हजारों मजदूरों ने दूसर राज्यों का रुख नहीं किया। मुम्बई और नासिक जैसी घटनाएं भी इसकी वजह मानी जा रही हैं। जानकारों की मानें तो नरगा से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और मजदूरों में यह विश्वास बढ़ा है कि वे अपने घर में रहकर भी इज्जत की रोटी कमा सकते हैं। वहीं निर्माण एजेंसियों पर भी स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने का दबाव है।ड्ढr ड्ढr उदाहरण के तौर पर बाढ़ बिजली घर के निर्माण कार्य में चार हजार से अधिक स्थानीय मजदूर काम कर रहे हैं। राज्य में करीब सात हजार से अधिक पुल-पुलियों, करीब दस हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य चल रहा है।ं

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