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ऊसर हो रही उत्तर बिहार की जमीन

ालजमाव वाली भूमि में क्षारीय गुण बढ़ने से उत्तर बिहार की जमीन लगातार ऊसर होती जा रही है। कृषि फार्म भी इससे अछूते नहीं हैं और जलजमाव वाले क्षेत्रों और इससे कृषि विभाग चिंतित है।18 वर्ष पहले गाडा की ओर से कराये गये सव्रेक्षण की भविष्यवाणी सही साबित हो रही है। यह समस्या उत्तर बिहार के आठ जिले के 1.20 लाख हेक्टेयर भूमि में है। अब विभाग जमीन को बचाने के लिए समेकित पोषण प्रबंधन योजना चला रही है।ड्ढr ड्ढr अनुमंडल कृषि पदाधिकारी (पूर्वी) ओएन सिंह ने बताया कि जिले के औराई, कटरा, गायघाट, मीनापुर, बंदरा समेत जलजमाव वाले क्षेत्रों में सूक्ष्म पोषक तत्व की मात्रा में लगातार कमी आने से भूमि क्षारीय हो रही है। इससे बचाव के लिए सबसे पहले मिट्टी जांच और उसके अनुसार खेतों में फॉस्फोिप्सम, जिंक व बोरोन का प्रयोग करने की जरूरत है। मिट्टी वैज्ञानिकों के अनुसार खेत में जलजमाव से घुलनशील लवण मिट्टी के नीचे चले जाते हैं जिससे से मिट्टी क्षारीय होती है।ड्ढr ड्ढr अनुमंडल कृषि (पश्चिम) रामविनोद शर्मा ने बताया कि जसौली व साहेबगंज फार्म की भूमि के भी क्षारीय होने की शिकायत मिली है। किसानों को खेतों में अंकुरण के बाद पौधों के बढ़ने और दाना निकलने पर नजर रखनी होगी। किसानों को मिट्टी जांच और उसके अनुसार उपचार की प्रकिया को साल-दर-साल दुहराना होगा। इसमें दस साल तक लग सकते हैं।

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