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चौके-छक्के-ठुमके

आईपीएल के मैचों में चीयर लीडर्स को लेकर दो तरह के लोगों में असंतोष है। एक तो वे लोग हैं जो क्रिकेट प्रेमी हैं और जिन्हें लगता है कि चीयर्स लीडर्स की वजह से क्रिकेट की बतौर खेल गंभीरता खत्म होती है। दूसर लोग वे हैं, जिन्हें नैतिक कारणों से आपत्ति है, जिन्हें चीयर्स लीडर्स का होना अनैतिक और अश्लील लगता है। ऐसे मुखर लोग ज्यादातर राजनेता हैं। जब नेता ऐसा करते हैं तो उसमें नैतिक से ज्यादा राजनैतिक रंग दिखाई देता है, लेकिन यह भी साफ है कि उनकी आपत्ति का वजन और प्रभाव ज्यादा होगा। क्रिकेट प्रेमियों की खास चिंता न तो खेल के कर्ता-धर्ताओं को, न नेताओं को होगी, लेकिन अगर महाराष्ट्र विधानसभा में शोर होता है तो बात दूर तलक जा सकती है। महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर. आर. पाटील, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के हैं और उन्होंने मुंबई में बार गर्ल्स पर प्रतिबंध लगाया था। भाजपा और शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार को इसी बात की याद दिलाते हुए मुंबई में होने वाले मैचों में चीयर लीडर्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग की और कांग्रेसी गृहराज्यमंत्री सिद्धराम म्हैत्रे भी नैतिकता पर खतर की बात से सहमत दिखे। गृहमंत्री आर. आर. पाटील यूं तो महाराष्ट्र में नैतिकता के सबसे बड़े सिपाही हैं, लेकिन मुसीबत यह है कि उनके नेता शरद पवार बीसीसीआई के अध्यक्ष भी हैं। बीसीसीआई तो आईपीएल को मुंबइया फिल्म की तरह तीन घंटे मनोरांन की तरह से बेच रही है और अगर इस मनोरांन में आइटम डांस न हो तो बॉक्स आफिस का क्या होगा। वैसे तो एकाध राजनेता को ही राजनीति के ‘आइटम बॉय’ की उपाधि से नवाजा जा चुका है, लेकिन यह लाइव आइटम शो हमार देश के सच्चरित्र और भोले-भाले लोगों के चरित्र को बिगाड़ रहा है, ऐसा हमार नेताओं को लगता है। नेताओं को यह सलाह दी जा सकती है कि अगर उन्हें राष्ट्रीय चरित्र और नैतिकता की इतनी परवाह है तो दूसर बहुत सार क्षेत्र हैं, जहां सफाई की जरूरत ज्यादा है, लेकिन यह भी सच है कि बार बालाओं और चीयर्स लीडर्स से बिगड़ने वाले चरित्र की परवाह करने में जो मजा है वह और कहाँ!

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