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खेती में नई सुबह के संकेत

बिहार के खेतों में नई ऊर्जा का संचार होगा। इसके केन्द्र में होंगे पंजाब और हरियाणा से लौटने वाले बिहारी मजदूर। उम्मीद है कि तब खेतों में वह पीढ़ी भी दिखेगी जो मजदूरों की कमी के कारण इससे परहेज करती थी। बिहार में इसे खेती की नई सुबह का संकेत माना जा रहा है। संभव है पचास की दशक वाली कृषि उत्पादकता बिहार फिर से प्राप्त कर ले।ड्ढr ड्ढr बिहारी मजदूर अपने वतन लौट रहे हैं। जानकारों की मानें तो खेतों पर इसका व्यापक असर होगा। खेतों से नई पीढ़ियों की दूरी के पीछे एक बड़ा कारण बड़े पैमाने पर बिहार से मजदूरों का पलायन भी रहा है। मेहनतकश मजदूरों की कमी के चलते ही कामगारों की तलाश में मध्य बिहार के लोग उत्तर बिहार तक की खाक छानते रहे हैं। लौट रहे मजदूर फिर से खेतों में जुट जाएं तो बिहार के खेतों से नई कृषि क्रांति शुरू हो सकती है। हाल ही में पटना में जुटे कृषि विशेषज्ञों ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि देश में हरित क्रांति का नया केन्द्र बिहार हो सकता है। उनका इशारा बिहार की उर्वर जमीन की ओर है, लेकिन हजारों-लाखों मजदूरों की वापसी हो तो यह ताल ठोंक कर कहा जा सकता है कि उनकी मेहनत रंग लाएगी। राज्य सरकार ने भी बिहार में कृषि आधारित व्यवसाय को नया आयाम देने की कोशिशें शुरू की हैं। कृषि के विकास के लिए बाकायदा रोडमैप तैयार किया गया है। किसानों के लिए बड़ी कंपनियां भी आगे आ रही हैं। फतुहा में ट्रैक्टर की फैक्ट्री इसी दिशा में उठाया गया कदम है। गड़बड़ी-गबन रोकने की योजनाड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। गड़बड़ी और गबन को रोकने के लिए ग्रामीण विकास विभाग प्लानिंग कर रहा है। तैयारी यह की जा रही है कि प्रखण्ड स्तर पर ही एकाउंट्स को दुरुस्त कर दिया जाए ताकि भविष्य में घोटाले और धांधली की गुंजाइश ही न बचे।ड्ढr ड्ढr विभाग ने सभी उप विकास आयुक्तों को हिदायत दी है कि प्रखण्ड स्तर पर ही एकाउंट्स को अपडेट करना सुनिश्चित करं। साथ ही यह चेतावनी भी दी गयी है कि हर माह प्रखण्ड स्तर पर एकाउंट्स को अद्यतन नहीं किए जाने की सूरत में अगर गबन और धांधली होती है तो इसके लिए प्रखण्ड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और उप विकास आयुक्त सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। पिछले दिनों उप विकास आयुक्तों के साथ योजनाओं की समीक्षा के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप मुखर्जी ने इस बात को भी गंभीरता से लिया था कि विहित प्रपत्र पर प्रखण्डों के एकाउंट्स से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करायी जा रही हैं। सहरसा और भागलपुर जिले को छोड़कर बाकी किसी भी जिले द्वारा विभाग के इस निर्देश का अनुपालन नहीं हो रहा है। रोहतास जिला ने इससे संबंधित एक रिपोर्ट भेजी भी लेकिन वह भी अधूरी ही है। विभाग ने अधिकारियों से कहा है कि अगर प्रखण्ड स्तर पर ही एकाउंट्स को ठीक-ठाक कर लिया जाए तो भविष्य में गबन की गुंजाइश ही नहीं होगी।

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