अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पहले भी टारगेट हुए हैं अधिकारीच

ऐसा नहीं कि माओवादियों द्वारा पहली बार किसी जेल पदाधिकारी को टारगेट किया गया है। इसके पहले भी इस संगठन ने कई घटनाओं को अंजाम दिया है। जनवरी 2001 में गया सेंट्रल जेल में पदस्थापित एक सहायक जेलर के धंधरबीघा (ाहानाबाद) स्थित पैतृक आवास को उग्रवादियों ने उड़ा दिया था। वर्ष 2004 में बेउर केन्द्रीय कारा के जेलर नागेन्द्र सिंह की राजधानी के नाला रोड में तब हत्या कर दी गई थी जब वे जेल से अपने निजी आवास जा रहे थे। उनके हत्यारों का आज तक सुराग नहीं मिल सका पर इस घटना के बाद काफी दिनों तक यह चर्चा थी कि नागेन्द्र की हत्या तब पिपुल्स वार के नाम से जाने जाने वाले माओवादियों ने ही की थी।ड्ढr ड्ढr बताया जाता है कि तब नागेन्द्र सिंह की बेउर में बंद एक माओवादी नेता से खटपट हुई थी। बहरहाल चार वर्षो के बाद भी जेलर की हत्या एक रहस्य ही बनी है। सुत्रों के अनुसार बीते चार अप्रैल को उग्रवाद प्रभावित एक जिले में स्थित एक उपकारा के जेलर पर भी उग्रवादियों ने हमले की योजना बनायी थी। ऐन वक्त पर इसकी भनक खुफिया तंत्र और राज्य पुलिस के उच्चाधिकारियों को लग गई। फिर पटना से संबंधित जिले के एसपी को इस आशय की सूचना दी गई और आनन-फानन में उक्त जेल पदाधिकारी से उनका आवास खाली कराया गया। इस तरह उक्त अधिकारी भी समय रहते प्रशासन की सक्रियता से बाल-बाल बच गए।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: पहले भी टारगेट हुए हैं अधिकारीच