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फ्लैंक्स खतरनाक, हादसे बढ़े

सिग्नल-साइन बोर्ड पर्याप्त नहीं और फ्लैंक्स खतरनाक। जर्जर सड़कों की मरम्मत की जा रही है, लेकिन किनारे एक- डेढ़ फीट का गैप। सावधानी को लेकर मानदंड के अनुरूप राष्ट्रीय उच्च पथों पर पर्याप्त सिग्नल-साइन बोर्ड नहीं हैं। इससे दुर्घटनाएं बढ़ी हैं। लोगों की जान जा रही हैं। एनएच-33 और 23 में दुर्घटना में इजाफा हुआ है। पेंट का डिमार्केशन नहीं होने से गाड़ियां कंट्रोल में नहीं रहतीं। जानकार कहते हैं कि फ्लैंक्स नहीं भर जाने से सड़क की क्षमता और लाइफ भी प्रभावित होती है। सोमवार को एनएच-23 (रांची-गुमला-वीरमित्रापुर) पर सिसई के निकट दो वाहनों के बीच टक्कर में छह लोगों की जान गयी। तीन दिन पहले एनएच-33 (रांची-बरही मार्ग) पर विकास के आगे सड़क दुघर्टना में दो डॉक्टरों की मौत हो गयी। एनएच-33 और 23 की हालत पहले से बेहतर हुई है। पर एनएच-33 पर बूटी मोड़ से ओरमांझी तक जगह-ागह खरतनाक फ्लैंक्स हैं। ये खतरनाक साबित हो रहे हैं। तीन महीने पहले ही इस सड़क को दुरुस्त किया गया, लेकिन फ्लैक्स पर काम नहीं हुआ। सड़क-ामीन का गैप एक -डेढ़ फीट तक है। अब अलग से पांच लाख का इस्टीमेट बनाने की तैयारी है। इसमें भी खेल है। फ्लैंक्स खतरनाक होने के कारण स्पीड में चलते ड्राइवर चाह कर भी गाड़ियों को सड़क से नीचे उतारने का साहस नहीं जुटाते। घाटी, जंगल से गुजरनेवाले एनएच पर मानदंड के अनुरूप सावधानी बरतने को सिग्नल नहीं हैं। पूर्व पथ सचिव ने एनएच के इंजीनियरों के साथ बैठक कर सावधानी के लिहाज से सिग्नल, साइन बोर्ड पर आवश्यक सूचना तथा फ्लैंक्स पर विशेष निर्देश दिये थे, लेकिन इस पर कायदे से काम नहीं हुआ।

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