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180 दिन नहीं हो रही पढ़ाइ

झारखंड की यूनिवर्सिटियों में यूजीसी के निर्देशों का उल्लंघन किया जा रहा है। यूजीसी के निर्देश के मुताबिक किसी भी यूनिवर्सिटी में 180 दिन की पढ़ाई नहीं हो रही। अलग राज्य बनने के बाद किसी भी यूनिवर्सिटी ने यह लक्ष्य हासिल नहीं किया। रांची यूनिवर्सिटी कोशिश के बाद भी पिछले सात वर्ष में 180 दिन की पढ़ाई नहीं करा सकी। 2001 में यहां 151 दिन पढ़ाई हुई। शेष वर्षो में यहां 120 से 125 दिन ही पढ़ाई हुई है। इसी प्रकार सिद्धो-कान्हू यूनिवर्सिटी में पिछले छह वर्ष में अधिकतम 134 दिन की पढ़ाई हो सकी है। विनोबा भावे विश्वविद्यालय इस मामले में सबसे पीछे है। यहां अधिकतम 132 दिन की पढ़ाई हो सकी है। यूजीसी के निर्देश के मुताबिक नामांकन और परीक्षा के लिए 72 दिन, अवकाश के लिए 60 दिन और 52 दिन रविवार की छुट्टियों के लिए निर्धारित हैं। पीजी के दो पार्ट और स्नातक के तीन पार्ट के अलावा इंटरमीडिएट के दोनों पार्ट की परीक्षाएं यहां कॉलेजों में हर साल होती हैं। इन सब परीक्षाओं के बाद कॉपी जांचने का काम भी होता है। कुल मिला कर 0 से ज्यादा दिन इन सब में निकल जाते हैं। औसतन दस से 15 दिन हर वर्ष विभिन्न आंदोलन और बंद की भेट चढ़ जाते हैं। परीक्षा के एक माह पूर्व फार्म भर जाने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके बाद से ही कक्षाएं ठप हो जाती हैं। स्टूडेंट्स यूनियन इस मामले को लेकर गंभीर है। यूजीसी को पत्र भेजने का निर्णय लिया है। तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित रांची यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो एए खान ने घटिया कॉपियों की जांच का निर्देश दिया है। इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गयी है। डीन कॉमर्स डॉ एसएनएल दास कमेटी के अध्यक्ष होंगे, डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य डॉ रामप्रवेश कमेटी के सदस्य एवं डीएसडब्लू डॉ सीएसपी लुगून सचिव हैं। समिति उत्तर पुस्तिकाओं की सप्लाइ, खरीद रट, सप्लाइ ऑर्डर के साथ दिये गये नमूने एवं सप्लाइ की गयी कॉपियों की जांच करगी। साथ ही जनवरी 2002 से कॉपियों की सप्लाइ एवं कॉपी खरीद की प्रक्रिया की जांच भी करगी। स्नातक पार्ट-3 की परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों ने घटिया कॉपी दिये जाने की शिकायत की थी। कॉपी जांचने के क्रम में परीक्षकों ने भी घटिया कॉपियों का विरोध किया था। रांची यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन ने भी गुरुवार को वीसी से इस मामले की जांच की मांग की थी। यूनियन की सचिव नाजिया तबस्सुम ने जांच जल्द पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। वीसी से मिले एमबीए छात्र रांची यूनिवर्सिटी के एमबीए के फाइनल इयर सत्र 2005-07 के छात्रों ने 25 अप्रैल को वीसी प्रो एए खान से मिल कर वाइवा परीक्षा शीघ्र कराने की मांग की। छात्रों ने कहा कि जून 2007 में ही उनका सत्र समाप्त होना था, लेकिन अब तक उनके वाइवा परीक्षा की तिथि निर्धारित नहीं हो सकी है। विभाग से लेकर यूनिवर्सिटी तक कई चक्कर वे लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रोफेसनल कोर्स में एक साल लेट होने से कैरियर प्रभावित होता है। उन्होंेने सवाल किया कि स्नातक के 30 हाार छात्रों का परीक्षाफल 25 दिन में जारी हो सकता है, तो एमबीए के 40 छात्रों का क्यों नहीं? छात्रों ने वीसी को बताया कि वे एचओडी से मिल चुके हैं। एचओडी ने उन्हें बताया कि वह पहले ही 1अप्रैल का डेट यूनिवर्सिटी को भेज चुके हैं, लेकिन जवाब नहीं मिला। धमकी से कर्मचारी भड़के रांची यूनिवर्सिटी के कर्मचारी ऑफिसर्स की हरकतों और धमकी से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि ऑफिसर अपनी गलती छुपाने के लिए उन्हें फंसाने पर तूले हैं। गुरुवार को वित्त विभाग के निरीक्षण के क्रम में प्रोवीसी के व्यवहार से नाराज कर्मियों ने 25 अप्रैल को संवाददाता सम्मेलन बुला कर कहा कि शिक्षकों को पीएचडी भत्ता दिये जाने और एचआरडी द्वारा वेतन विपत्र वापस भेजने के लिए सिर्फ कर्मियों को दोषी बताया जा रहा है। रांची विवि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बसंत कच्छप एवं सचिव नवीन चंचल ने कहा कि शिक्षकों को दो दिन में ही पीएचडी भत्ता देने के लिए उन पर दबाव बनाया जा रहा है। कुछ ऑफिसर वीसी को भ्रमित कर रहे हैं। 22 अप्रैल को एचआरडी से पीएचडी भत्ते की राशि मिली। 23 अप्रैल को प्रक्रिया पूरी कर एफओ के पास भेज दिया गया। उधर 24 अप्रैल को कुछ शिक्षक नेता पहुंच गये वीसी के पास। बस तिने पर ही विभाग का निरीक्षण हो गया और कार्रवाई की धमकी भी मिल गयी। त्रुटियां गिनायीं कर्मियों ने रांची यूनिवर्सिटी हेडक्वार्टर के कर्मचारी नेता बसंत कच्छप एवं नवीन चंचल ने शिक्षकों के पीएचडी भत्ते में व्याप्त त्रुटियों की ओर इशारा किया। उनका कहना था कि 1से पीएचडी भत्ते का प्रस्ताव भेजा गया है। इसकी जांच होनी चाहिए। बिहार के कार्यकाल के भत्ते की राशि झारखंड से क्यों मांगा जा रहा है। जब बिहार के कार्यकाल के यूजीसी वेतनमान की अंतर राशि झारखंड नहीं दे सकता, तो भत्ता कैसे देगा। ं

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