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वल्लाह! मैं तो साहब बन गया

ुलियों के दिन बहुर गए हैं। एक ओर सरकरी नौकरी और दूसरी ओर ससुराल में हीरो का दर्जा। दरअसल रेलमंत्री ने रल बजट के दौरान कुलियों को गैंग मैन बनाने की जो घोषणा की थी अब उसे अमल में लाया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार बीते 22 अप्रैल से नई दिल्ली, दिल्ली व हारत निजामुद्दीन स्टेशनों पर कुलियों का इंटरव्यू लिया जा रहा है। अंगूठा छाप कुलियों को सरकारी मुलाजिम नहीं बनाया जाएगा। इसलिए आजकल दिल्ली के कुली बोझा छोड़ किताबें बांच रहे हैं। बिहार में तो आलम और भी खुशगवार है। यहां के कुली अपना बिल्ला अपने सालों के नाम ट्रांसफर करा रहे हैं। उत्तर रलवे के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, कुलियों की छंटनी का काम शुरू कर दिया गया है। 18 से 50 वर्ष की उम्र सीमा में आने वाले कर्मचारियों का इंटरव्यू लिया जा रहा है। दिल्ली मंडल के अधिकारियों की एक टीम इनकी योग्यता का टेस्ट ले रही है। इस टेस्ट में सफल रहने वालों का मेडिकल टेस्ट किया जाएगा और उसके बाद उन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। दिल्ली मंडल के एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर कुली पढ़ाई-लिखाई के अभाव में छंट रहे हैं। बहुत कम ऐसे कुली हैं, जो ठीक प्रकार से लिखना-पढ़ना जानते हैं। कुलियों के नेता कमरुद्दीन ने बताया कि उसका इंटरव्यू 28 अप्रैल को होगा। नई दिल्ली में करीब 1500 कुली हैं, जबकि दिल्ली जंक्शन पर करीब 850 व हारत निजामुद्दीन पर करीब 650 कुली हैं। इनमें से भी काफी कुली उम्र व शैक्षणिक योग्यता के आधार पर छंटेंगे। दूसरी ओर समस्तीपुर रल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर बिल्ला (लाइसेंस) ट्रांसफर कराने के लिए आवेदनों की झड़ी लग गई है। ज्यादातर कुलियों ने अपना बिल्ला साले अथवा बहनोई के नाम ट्रांसफर करने की अपील की है। रलवे सूत्रों के अनुसार, नए आवेदक बलिया, वाराणसी, छपरा, सीवान आदि जगहों के हैं। मीडिया प्रभारी सह वरिष्ठ डीसीएम जफर आजम ने बताया कि रल मंत्रालय का निर्देश है कि कुलियों का बिल्ला उनके पुत्र, दत्तक-पुत्र एवं साले के नाम ट्रांसफर किया जा सकता है। कुलियों ने आवेदन में जिन लोगों को अपना रिश्तेदार बताया है वह वाकई में रिश्तेदार हैं या नहीं इसकी जांच एक बड़ी परेशानी बन गई है। इस संबंध में मुख्यालय से राय मांगी गई है।

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