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मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते पर शिक्षक नहीं

मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते हैं पर शिक्षक नहीं है। सामान्य कैडर के डॉक्टर है पर उन्हें अस्पताल में इलाज कार्य से हटा लिया गया है। एमसीआई के पास शिक्षकों के रूप में नाम दर्ज कराया गया है पर शैक्षणिक अनुभव का कोई लाभ नहीं मिलेगा। यह तस्वीर सूबे के छह मेडिकल कॉलेजों में बहाल करीब 475 सीनियर रजीडेंट और ट्यूटरों का बनी हुई है। खुद में यह पहेली बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग है कि इस पहेली का राज खोलना नहीं चाहता।ड्ढr ड्ढr राज्य के मेडिकल कॉलेजों की मान्यता के लिए कार्यकारी व्यवस्था के तहत 2005 से ठेके पर सीनियर रजीडेंट और ट्यूटरों की बहाली आरम्भ की गयी। स्वास्थ्य सेवा के अहर्ता प्राप्त वरीय चिकित्सकों का रोस्टर क्िलयरंस के साथ आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए कनीय पदों पर बहाली की गयी। इस बहाली में1ी नियमावली का पालन भी नहीं किया गया। अधिसूचना में कहा गया था कि अनुबंध एक वर्ष के लिए मान्य है। उन्हें कोई शैक्षणिक अनुभव का लाभ नहीं मिलेगा। अभी तक नियमित बहाली नहीं हो सकी है। इस बीच दो लॉट में नए चिकित्सक बहाल भी हो गये। सभी शिक्षकों की उम्र 50 वर्ष से ऊपर की है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के महामंत्री डा.राजीव रंजन प्रसाद और संविदा चिकित्सा शिक्षा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डा.अरविन्द्र कुमार सिन्हा कहा कि कनीय पदों पर नियमित शिक्षकों की बहाली नहीं होने पर मेडिकल कॉलेजों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

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  • Web Title: मेडिकल कॉलेज में पढ़ाते पर शिक्षक नही