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सशक्त स्थायी समिति का पेंच

राजधानी को आधुनिक, सुंदर व सुविधा संपन्न बनाना अब नौ जनप्रतिनिधयों के हाथ में है। इनमें मेयर भी शामिल हैं। निगम प्रशासन मास्टर प्लान-2021 को तकनीकी तौर पर अंतिम रूप दे चुका है। इसे 22 अपैल को हुई नगर निगम सशक्त स्थायी समिति की बैठक में स्वीकृति के लिए पेश किया गया लेकिन उसमें महायोजना पर आपत्ति उठा दी गई। समिति का तर्क था कि मास्टर प्लान का प्रारूप देखने के बाद ही अंतिम निर्णय होगा। बहरहाल, पांच वर्षो की कसरत के बाद तैयार यह महायोजना समिति के नकारात्मक रुख के कारण अटक गई।ड्ढr ड्ढr ऊपर से इस मामले पर कोई भी अपना मुंह खोलने को भी तैयार नहीं है। 1ी प्रथम और 1001 की दूसरी महायोजना का समय समाप्त हो जाने के बाद 21 जनवरी 2003 में तत्कालीन पीआरडीए ने कोलकाता के मेसर्स डेवलपमेंट कन्सलटेंट प्रा. लि. को 42,35,660 रुपए खर्च कर पुनरीक्षित मास्टर प्लान-2001 तैयार करने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया। सात जुलाई 2006 को कन्सलटेंट ने महायोजना का प्रारूप पीआरडीए को सौंपा। एक सितंबर 2006 को इसे सार्वजनिक किया गया और आम लोगों की राय व आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 120 दिनों का समय दिया गया। सुझाव व आपत्तियां प्राप्त होने के बाद बोर्ड ऑफ इंक्वायरी का गठन किया गया। बोर्ड ने 16 अक्टूबर 2006 से 10 जनवरी 2007 के बीच सात बैठकें कीं। महायोजना में जरूरी सुधार करने के बाद 15 जनवरी 2006 को पीआरडीए ने आंशिक सुधार के लिए कन्सलटेंट को कागजात उपलब्ध कराये। कन्सलटेंट ने इसमें सुधार कर एक साल बाद नगर निगम को योजना की दस प्रतियां उपलब्ध करा दीं, जिन्हें समिति की बैठक में रखा गया। अब निगम प्रशासन का कहना है कि तैयार मास्टर प्लान की तकनीकी तौर पर पूरी तरह जांच-पड़ताल कर ली गई है। सशक्त स्थायी समिति से स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार को मंजूरी के लिए भेजा जायेगा।ं

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