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भाई की मौत ने बनाया लादेन को आतंकी

अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी सरगना आेसामा बिन लादेन के बड़े भाई सलेम की विमान दुर्घटना में मौत एक ऐसी घटना थी, जो अगर नहीं होती तो आेसामा कभी आतंकवाद के रास्ते पर नहीं जाता। पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक स्टीव कोल की बिन लादेन परिवार के बारे में लिखी गई नई किताब ‘द बिन लादेन्स’ में यह बात कही गई है। कोल ने एक विशेष साक्षात्कार में बताया कि इस नई किताब की खासियत यह है कि इसमें बिन लादेन परिवार को समझने की कोशिश की गई है। किताब यह भी जानने की कोशिश करती है कि कैसे एक पढ़ा लिखा व्यक्ित इस्लामी जेहाद के रास्ते पर चला गया। किताब के मुताबिक वर्ष 1में आेसामा के पिता की मौत हो गई थी। उस समय आेसामा महज नौ साल का था। आेसामा के पिता की मौत के बाद उसके सौतेले भाई सलेम ने सारा करोबार संभाल लिया। सलेम की सऊदी अरब के शाही खानदान के साथ काफी नजदीकियां थी। इन्हीं नजदीकियों का फायदा बिन लादेन परिवार को हुआ और उन्हें बड़ी-बड़ी इमारतों के निर्माण का ठेका मिला। धीरे-धीरे बिन लादेन परिवार पर दौलत बरसने लगी। सलेम ने बिन लादेन परिवार के लिए अकूत संपत्ति एकत्र कर ली। हालांकि उस समय आेसामा भी पारिवारिक कारोबार से जुड़ा हुआ था, लेकिन साथ ही वह इस्लामी शिक्षा भी ग्रहण कर रहा था। वर्ष 1में सलेम की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। सलेम आेसामा के लिए पिता समान था। सलेम की मौत के बाद आेसामा टूट गया। इसी दौरान उसका परिचय मिस्र में अयमन अल जवाहिरी और दूसरे इस्लामी विद्वानों से हुआ। आेसामा का दिमाग कारोबार की बजाय इस्लाम की आेर मुड़ गया। आेसामा यमन के इस्लामी विद्रोहियों को मदद देने लगा। इसी दौरान इराक ने कुवैत पर हमला कर दिया। कुवैत की मदद के लिए अमेरिकी फौज सऊदी अरब पहुंच गई। बस इसी समय आेसामा ने तय कर लिया कि वह अपना जीवन ‘इस्लामी जेहाद’ को समर्पित कर देगा। आेसामा ने अपनी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा अफगानिस्तान में सोवियत सेनाआें से लड़ रहे मुजाहिद्दीनों को भी जेहाद के लिए दिया। ड्ढr कोल ने बताया कि मैं सलेम के कई दोस्तों से मिला हूं। उनका कहना था कि अगर सलेम आज जिंदा होता तो आेसामा कभी इस रास्ते पर नहीं चलता। आेसामा अपने 53 भाई बहनों में सलेम को सबसे यादा चाहता था। आेसामा की गतिविधियों से सऊदी अरब का शाही परिवार खुद को खतरे में महसूस करने लगा और उन्होंने आेसामा को देश छोड़कर चले जाने के लिए कहा। आेसामा सूडान, मिस्र, जॉडर्न, पाकिस्तान होते हुए अन्त में अफगानिस्तान पहुंचा। कोल का कहना है कि बिन लादेन परिवार के नियंत्रण वाली कंपनियों में बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारी काम करते थे, जिनमें कुछ अमेरिका के भी थे। लेकिन उस समय आेसामा खुले दिमाग का व्यक्ित था लेकिन भाई की मौत के बाद वह कट्टरवाद की और बढ़ता चला गया।

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