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भारत-पाक बैंकिंग रिश्ते पटरी पर लाने की तैयारी

भारत और पाकिस्तान के बीच आजादी के समय खत्म हो गये बैंकिंग रिश्तों को एक बार फिर पटरी पर लाने की कोशिश हो रही है। इसके तहत दोनों देश एक दूसर के दो बैंकों को कारोबार की इजाजत देने पर सहमत हो गये हैं। लेकिन बैंकों के नाम पर अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है। इसी प्रक्रिया के तहत पाकिस्तान ने दो बैंकों के नाम भारतीय रिार्व बैंक को भेज दिये हैं। वित्त मंत्रालय के बैंकिंग विभाग के एक उच्चाधिकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने यूनाइटेड बैंक ऑफ पाकिस्तान और नेशनल बैंक ऑफ पाकिस्तान के नाम रिार्व बैंक को भेजे गये हैं। जबकि भारत की ओर से भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के नाम पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को भेजे गये हैं। दोनों देशों के केंद्रीय बैंक दोनों ओर से आये बैंकों के नाम पर विचार करने के बाद इन्हें कारोबार की हरी झंडी देंगे। इस अधिकारी ने बताया कि रिार्व बैंक द्वारा पाकिस्तानी बैंकों के नाम पर सहमति की स्थिति में वित्त मंत्रालय के बैंकिंग विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उसके बाद सरकार इस बारे में अंतिम फैसला लेगी। दोनों देशों के बीच बैंकिंग रिश्ते कायम करने को लेकर सैद्धांतिक सहमति है। पाकिस्तान की ओर से पहले हबीब बैंक के नाम का प्रस्ताव आया था। हबीब बैंक में आगा खां फाउंडेशन की इक्िवटी भागीदारी है। इसके साथ ही देश के एक निजी क्षेत्र के बैंक डेवलपमेंट क्रेडिट बैंक में भी आगा खां फाउंडेशन की इक्िवटी भागीदारी है। इस क्रास होल्डिंग को हबीब बैंक के प्रस्ताव को खारिा करने का आधार बनाया गया था। लेकिन बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक हबीब बैंक को कारोबारी इजाजत नहीं देने के पीछे हबीब बैंक के आतंकी संगठनों के साथ कारोबारी रिश्तों को लेकर सामने आये तथ्य असली कारण थे। हबीब बैंक पाकिस्तान का सबसे बड़ा बैंक है। विदेशों में सबसे अधिक शाखाओं के मामले में भी यही सबसे बड़ापाकिस्तानी बैंक भी है।

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