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मोदी की हवा तो झामुमो का दबदबा भी

मोदी की हवा तो झामुमो का दबदबा भी

मतदान के दौरान दुमका विधान सभा सीट के मतदाताओं से मिले फीडबैक से यह स्पष्ट है कि वोटरों का धुव्रीकरण द्विपक्षीय हुआ है। मोदी की हवा चली है तो झामुमो का दबदबा भी नजर आया। अब थोड़े बहुत वोटों के अंतर से बाजी कौन मरेगा या कहना  मुश्किल है। खासकर दुमका विधान सभा में शहर में भाजपा भारी दिखी। वहीं संताल बहुल बस्तियों में तीर-धनुष का ही जलवा है। कई क्षेत्रों में बूथ प्रबंधन के मामले में भाजपा के मुकाबले झामुमो बीस नजर आया। शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान की गति भी तेज देखने को मिली।

दृश्य एक : शनिवार की सुबह 6.30 बजे दुमका के कुवंर सिंह चौक पर दस-बार लोग पहुंचे हुए थे। चौक से दस फर्लाग की दूरी पर जिला परिषद् भवन स्थित बूथ में वोट करने आए थे। मतदान शुरू होने में समय था इसलिए लोग आपस में बातचीत कर रहे थे। सामने की झोपड़ीनुमा दुकान में चाय तैयार थी। एक ने कहा कि इस बार दीदी को कंफर्म समझो। इशारा भाजपा प्रत्याशी लुईस मरांडी की ओर था।

दूसरा दृश्य : सुबह नौ बजे हैं। दुमका शहर से चार-पांच किलोमीटर दूर काठीजोड़िया संतालों की बड़ी बस्ती है। यह दुमका विस क्षेत्र में है। काठीजोरिया से थोड़ा आगे बढ़ने पर शिकारीपाड़ा विधान सभा क्षेत्र शुरू हो जाता है। काठीजोरिया में मतदाताओं की लंबी कतार देखने को मिली। इसी बीच एक बुजूर्ग मतदाता मतदान करके बाहर आए। नाम पूछने पर झट से तीर-धुनष बोल कह दिया। शायद लगा कि वोट के बारे में सवाल किया गया है। वैसे इसका संकेत साफ था कि काठीजोड़िया जैसे संथाल बहुल बस्तियों में झामुमो की जड़ें मजबूत है। 

जामा : झामुमो-भाजपा में ही मुख्य मुकाबला
जामा में गुरूजी की बहू सीता-सोरेन और भाजपा के सुरेश मुर्मू के बीच ही मतदाता बंटे नजर आए। म्हारो से कुछ दूर बासुकीनाथ रोड पर बूथ में सैंकड़ों की संख्या में मतदाता कतारबद्ध नजर आए। इनमें ज्यादातर इन्हीं दो पार्टियों के समर्थक थे। वैसे कुछ पॉकेट में जेवीएम के सुखलाल मुर्मू की मौजूदगी भी देखने को मिली। सुनील हेम्ब्रम ने कहा कि सीता-सुरेश में ही कोई जीतेगा।

शिकारीपाड़ा : नलिन सोरेन को जेवीएम-कांग्रेस की चुनौती
दुमका से सटे नक्सल प्रभावित शिकारीपाडम विधान सभा क्षेत्र में दुमका जैसी स्थिति नहीं है। झामुमो के नलिन सोरेन दो दशक से चुनाव जीतत रहे हैं। इस बार भी मैदान में है। भाजपा की जगह यहां लोजपा के शिवधन मुर्मू मैदान में हैं। वैसे जेवीएम के परितोष सोरेन एवं कांग्रेस के राजा मरांडी के समर्थन में काफी मतदाता नजर आए। मोटे तौर पर शिकारीपाडम में जेएमएम बनाम अन्य की लडमई हुई है। जेवीएम समर्थकों का कहना है कि उनकी स्थिति ज्यादा बेहतर है। वैसे कांग्रेस प्रत्याशी की मौजूदगी से जेवीएम को नुकसान भी होने का तर्क लोग हवाला दे रहे हैं।

जरमुंडी : झामुमो-भाजपा और जेवीएम में बंटा वोट
जरमुंडी से लगातार दो बार निर्दलीय विधायक बने हरिनारायण राय को इस बार भाजपा के अभयकांत और जेवीएम के देवेंद्र कुवंर से टक्कर है। जरमुंडी में वोटों के जबरदस्त बिखराव से तस्वीर बुहत स्पष्ट नहीं है। मोदी के नाम पर भाजपा को वोट मिला है तो जेवीएम प्रत्याशी देवेंद्र कुवंर बाबूलाल मरांडी एवं स्वयं के नाम पर कई क्षेत्रों में मजबूत नजर आए। नोनीहाट जैसे इलाके में देवेंद्र मजबूत हैं। वहीं झामुमो प्रत्याशी हरिनारायण राय की स्थिति भी सुधरी है। स्वजातीय के साथ-साथ जेएमएम के वोट भी मिले हैं। भाजपा का मजबूत पक्ष हर इलाके में कुछ न कुछ वोट मिला है। कांग्रेस के बादल एवं कई ठसक वाले निर्दलीय प्रत्याशियों ने मतदान के बाद भी समीकरण को उलझाए रखा है।

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