DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बहुत याद आएगी चाइना वॉल

ुछ दिन पहले की ही तो बात है। मेरी यहीं चंडीगढ़ में उनसे मुलाकात हुई थी। वे पूरी तरह से फिट थे। हम सेक्टर-42 स्टेडियम में कुछ युवा हॉकी खिलाड़ियों को टिप्स दे रहे थे। मुझे नहीं पता था कि इसके बाद त्रिलोचन बावा से मैं कभी नहीं मिल पाऊंगा। वह मेरा बचपन का साथी था। मैं तो ज्यादातर समय वैंकूवर में अपने बेटे के पास ही रहता हूं। हां, सर्दियों में यहां चंडीगढ़ अपनी बेटी के पास आ जाता हूं। जब भी चंडीगढ़ आता हूं तो सबसे पहले त्रिलोचन से ही मुलाकात होती है। हम हॉकी ही साथ नहीं खेलते थे बल्कि नौकरी भी हमने एक ही डिपार्टमेंट, पंजाब पुलिस में की थी। देश बंटा, राज्य बंटा लेकिन हमारी दोस्ती में कभी दरार नहीं आई। हम दोनों के परिवार में भी काफी मेलजोल था। बंटवारे से पहले त्रिलोचन लाहौर में थे। फिर पंजाब आ गए। बाद में पंजाब के भी दो टुकड़े हो गए। हरियाणा नया राज्य बन गया। त्रिलोचन हरियाणा पुलिस में चले गए और मैं पंजाब पुलिस में रह गया। त्रिलोचन हरियाणा पुलिस में एसपी के पद तक पहुंचे। पंजाब पुलिस और राज्य का एक साथ प्रतिनिधित्व करने के बाद हमें ओलंपिक में भई साथ-साथ खेलने का मौका मिला। 1ओलंपिक में हम साथ-साथ थे।फुलबैक में उनका जवाब नहीं था। यही कारण था कि उन्हें चाइना वॉल कहा जाता था। आजादी के बाद भारतीय टीम पहली बार ओलंपिक में हिस्सा ले रही थी। खास बात यह है वेम्बले में खेले गए फाइनल में सामने थी ग्रेट ब्रिटेन की टीम। ब्रिटेन से यह हमारा पहला ऑफिसियल मैच था। हमने उसे 4-0 से हराया। पहले दो गोल मेरी स्टिक से हुए। तीसरा गोल त्रिलोचन ने पेनल्टी पर किया था। चौथा गोल पेट जानसन ने किया। ओलंपिक में पहली बार भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। पहली बार ही राष्ट्रगान जन-गण-मन की धुन भी बजी। हम सभी भावुक थे। मैंने देखा त्रिलोचन की आंखों में तो आंसू थे। ये खुशी के आंसू थे। टीम में सबसे ज्यादा प्रिय थे त्रिलोचन। लम्बे कद के शालीन स्वभाव के व्यक्ित। कभी किसी से कोई झगड़ा नहीं हुआ। आजादी का पहला ओलंपिक स्वर्ण जीतने के बाद हम शिप से स्वदेश आए। यूरोप का गुडविल टूर करते हुए 26 दिन में हम मुम्बई के करीब पहुंचे। वहां पहुंचे तो समुद्र के किनारे पर इतना पानी नहीं था कि हमारी शिप किनारे लग सकती। दो दिन और हमें समुद्र में गुजारना पड़ा। इन 26 दिनों की यात्रा के दौरान भी त्रिलोचन ने हमारे पूरे दल का खूब मनोरांन किया। उनका मजाकिया स्वभाव ही था जो उन्हें सबका प्रिय बनाए रखता था। दिल्ली पहुंचने पर हमने आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद और प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सामने नेशनल स्टेडियम में एक दोस्ताना मैच खेला था। जिसे देखने के लिए हाारों लोग स्टेडियम में उपस्थित थे।जब भी मैं चंडीगढ़ आता था तो त्रिलोचन के साथ तो मेरा समय अच्छा कट जाता था। अगली बार जब मैं यहां आऊंगा तो चाइना वॉल को बहुत मिस करूंगा। पता नहीं कैसे समय काटूंगा।ड्ढr (संजीव गर्ग से बातचीत के आधार पर)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बहुत याद आएगी चाइना वॉल