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राजरंग

हे प्रभु, साहेब की एक बार फिर विदेश यात्रा लगवा दीजिए। एक और मौका दिलवा दीजिए, तो सवा मन बेसन का लड्डू चढ़ावा चढ़ायेंगे। एसे-वैसों को दिया है, एक बार हमर साहेब को भी लिफ्ट करा दे। काहे कि साहेब जबसे विभाग की कमान संभाले हैं दोबारा फॉरन टूर का जोगाड़े नहीं बैठ रहा है। एक हाली कनाडा ही जा पाये हैं। वो दिन भी क्या दिन थे जब विभाग के मंत्री और बड़े साहब की साल में दो-दो बार लग जाती थी। लगता है अब विदेश यात्रा को किसी की नजर लग गयी है। साहेब के गोल-गाल चेहर पर पान की गिलौरी इतनी फबती है कि मत पूछिये, नौकरी में लगभग पूरा वक्त काट चुके हैं। फिर भी नये-नवेले लगते हैं। बूझिये कि अभी-अभी प्रोबेशन में आये हैं। स्टेट सर्विस से इंट्री लेकर इंडियन एडमिन्स्रिटेशन तक पहुंच गये। एक देश सेवा के हाकिम की क्या तमन्ना होती है, पहला जिले का प्रभार और दूसरा सचिवों का चीफ बनना या फिर दिल्ली सेवा में जाना। साहब तो कई जिलों को देख-सुन कर यहां तक पहुंचे हैं, उम्र बाकी रहती, तो चीफ भी हो जाते। खर अभी साहब जय-ाय शिवशंकर की माला खूब जपते हैं।

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