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झारखंड-एमपी के बीच बनेगा टाइगर कॉरिडोर

झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच टाइगर कॉरिडोर बनेगा। 1280 वर्ग किलोमीटर वन भूमि क्षेत्र में बननेवाले कॉरिडोर से संबंधित योजना केंद्र सरकार को भेज दी गयी है। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट को जीवित रखने के उद्देश्य से इस नयी योजना को मूर्त रूप देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि केंद्र सरकार से आर्थिक मदद मिलती रही। केंद्र सरकार द्वारा बनाये गये आइटीसीपी के तहत बाघ की संख्या बढ़ाने को लेकर देश के सभी राज्यों में कॉरिडोर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पलामू टाइगर प्रोजेक्ट को फिलहाल केंद्र सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। राज्य का वन्य प्राणी विभाग बाघों को संरक्षण देने और उन्हें बेहतर प्राकृतिक माहौल देने के साथ-साथ तस्करी से बचाने के लिए कॉरिडोर योजना तैयार की गयी है। झारखंड से छत्तीसगढ़ होते हुए मध्यप्रदेश के बीच 1280 वर्गकिलोमीटर के क्षेत्रफल में बनाये जानेवाले कॉरिडोर से बाघों की संख्या में भी वृद्धि होगी। बिल्ली प्रजाति के जानवरों की संख्या में वृद्धि के लिए यह कॉरिडोर लाभकारी सिद्ध होगा। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पलामू टाइगर परियोजना अकेले 1028 वर्ग मीटर में है। इस क्षेत्र में बाघों की संख्या को लेकर कई बार विवाद हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि कॉरिडोर बनने से प्रजनन के बाद बाघों के बच्चों को सुरक्षित माहौल मिलेगा। पलामू टाइगर प्रोजेक्ट को मध्यप्रदेश स्थित संजय गांधी नेशनल पार्क से जोड़े जाने की योजना है। इधर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के नियमानुसार कोई भी कॉरिडोर 800 से 1000 वर्ग किलोमीटर होना चाहिये, जिसमें 80 से सौ के बीच बाघों की संख्या होनी चाहिये। साथ ही इनमें 20 मादा बाघ की संख्या अनिवार्य है।

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