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इनकी तो मौजां ही मौजां

बिरसा मुंडा जविक उद्यान में आरामतलबी का जीवन जी रहे हैं जंगली जानवर। आम आदमी को अभी आम मयस्सर नहीं हो पा रहा है, लेकिन जानवरों को भरपेट आम परोसा जा रहा है। तरबूज का भी वे मजा ले रहे हैं। जानवरों के लिए फलों की कमी न हो, इस पर डाक्टर और डायटिशियन को विशेष हिदायत दी गयी है। भोजन के पहले और बाद में ग्लूकोन डी के साथ एंटी-डिहाइड्रेशन की दवा भी दी जा रही है। निदेशक ने खाने और पीने की चीज में किसी प्रकार की कोताही न बरतने की सलाह दी है। ये सार उपाय जविक उद्यान में जंगली जानवरों को गरमी से निजात दिलाने के लिए किये गये हैं। तापमान 40 डिग्री के पार होने के बाद उद्यान के निदेशक पीके वर्मा ने चिकित्सक और जानवरों की देखभाल में लगे कर्मियों को विशेष ख्याल रखने को कहा है। हर-भर जंगल से घिर जविक उद्यान में गरमी से बचाने के लिए शेड के साथ इनक्लोजर छावनी भी तैयार की गयी है। जिसमें हिरण, वायसन सहित कई अन्य जानवरों को रखा गया है। जबकि बाघ सलीम, शेर अजरुन और बाघिन सरस्वती सहित चीता राजा को एयर कुलर की ठंडी हवा खिलायी जा रही है। हाथी को हर दिन झील में नहलाया जा रहा है। जानवरों को दिन में कम से कम दो बार ग्लुकोन-डी दिया जा रहा है। एंटी-डिहाइड्रेशन की दवा दी जा रही है। शाकाहारी जानवरों को खाने में सिर्फ आम और तरबूज देना है।

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  • Web Title: इनकी तो मौजां ही मौजां