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एटमी डील जरूरी : ब्रजेश मिश्र

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे ब्रजेश मिश्र ने भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते की पुरजोर वकालत करते हुए कहा है कि यदि यह समझौता नाकाम रहता है, तो देश को घरेलू और अन्तरराष्ट्रीय मोर्चे पर नुकसान सहना पड़ेगा। वामपंथी दलों और भारतीय जनता पार्टी के लगातार विरोध के कारण अधर में लटके परमाणु समझौते के बारे में उन्होंने कहा कि मनमोहन सरकार को इस समझौते को अंजाम तक पहुंचाना चाहिए। समझौता नहीं होने से भारत की जग हंसाई होगी। श्री मिश्र ने एक टेलीविजन चैनल के साथ साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि परमाणु समझौते से जुड़े मुद्दों पर भाजपा नेतृत्व ने उनके साथ कोई विचार विमर्श नहीं किया है। परमाणु समझौता भारत को भविष्य में परमाणु परीक्षण करने से नहीं रोकता, लेकिन यह जरुर है कि ऐसा होने पर देश को आर्थिक और विभिन्न प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। मिश्र के अनुसार परमाणु समझौता नहीं हो पाने से देश के त्रिस्तरीय परमाणु कार्यक्रम बुरा असर पड़ेगा क्योंकि देश को परमाणु सामग्री और जरूरी तकनीक नहीं मिल सकेगी। विभिन्न सरकारी प्रतिनिधि यह स्पष्ट कर चुके है कि परमाणु समझौते से देश के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर कोई रोक नहीं लगेगी। अमेरिका में नए राष्ट्रपति की प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि नया प्रशासन सीटीबीटी पर नए सिरे से जोर देगा तथा भारत को अन्तरराष्ट्रीय दबाब में उसे स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते पर अमल अभी होना चाहिए। वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश इस समझौते के प्रति वचनबद्ध हैं। नया प्रशासन इस रूप में समझौते की पेशकश नहीं करेगा।

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