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गया में पानी के लिए हाहाकार

गया शहर में बढ़ती तपिश ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। पारा के तेजी से ऊपर चढ़ने से न सिर्फ गर्मी भीषण हुई है बल्कि जलस्तर भी तेजी से खिसक रहा है। कई मुहल्लों के चापाकल इस चढ़ती गर्मी में ही सूख गए हैं। बिजली की लचर आपूर्ति से सरकारी सप्लाई भी अपनी औकात पर आ गई है। नतीजतन लोग सोने की बजाय नलों से पानी इकट्ठा करने में रातें बिता रहा हैं। गरीब-गुरबों के बच्चों ने स्कूल इसलिए जाना छोड़ दिया है कि वे सुबह से शाम तक लाइन में लगकर पानी घर ला रहे हैं । तब उनके घर का रोजाना कामकाज चल पा रहा है। इधर मुहाफिज बैठकें कर कागज पर पानी की आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ करने में मशगूल हैं।ड्ढr ड्ढr शहर में इस समय चारों और पानी के लिए हाहाकार मचा है। बैरागी ,मुरली हिल, डोमटोली, रामपुर, गेवाल बिगहा, मुस्तफाबाद, स्टेशन रोड इत्यादि मुहल्लों में रात हो या दिन किसी भी समय सरकारी नलों व चापाकलों पर भीड़ आसानी से देखी जा सकती है। महिलाओं व बच्चों को इसमें काफी परेशान उठानी पड़ रही है। पुरुष दिन में अपनी आजीविका कमाने चले जाते हैं, तो उन्हें पानी लाने की जहमत उठानी पड़ती है। पुरुष बेचारे रात में सोने के बदले पानी भर-भर कर घर में जमा कर रहे हैं। इतनी मेहनत के बाद भी पानी तब मिल पाता है जब बिजली रहती है, अन्यथा मीलों दूर से उन्हें व उनके बच्चों को पानी ढोकर लाना पड़ता है। पानी के कारण बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया है।ड्ढr इतना ही नहीं पानी ढोने से बच्चों के हाथों में छाले पड़ गए हैं। बैरागी, मुरली हिल, डोमटोली इत्यादि की स्थिति काफी भयानक है। इनमें ज्यादा संख्या विपन्नों की ही है और वे पूर्णत: सरकारी नल व चापाकल पर ही निर्भर है। मुरली हिल पर निर्मित टंकी में पानी इकट्ठा होता तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती लेकिन मेन पाइप से इतने कनेक्शन ले लिए गए हैं कि उसमें पानी भरता ही नहीं। यहां के लोगों को रात में तीन-चार किमी पैदल चलकर रेलवे के लोको शेड से पानी लाना पड़ता है। कुछ लोग साइकिल व ठेले से गैलन में पानी ला रहे हैं।

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