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नाम परिवर्तन को मान्यता नहीं देता आयोग

नाम बदलने के मामले में ज्यादातर विधायकों ने हल्का-फुल्का परिवर्तन ही किया पर एक माननीय तो पूरा नाम बदलने के चक्कर में थे मगर विधानसभा सचिवालय ने यह कहकर रोक दिया कि वह नाम में अंशत: परिवर्तन कर सकते हैं। बशर्ते नाम का मूल स्वरूप न बदल रहा हो।ड्ढr विधानसभा के प्रमुख सचिव राजेन्द्र प्रसाद पाण्डेय के मुताबिक विधायक विधानसभा सचिवालय को यह लिखकर देते हैं कि नामांकन के समय मतदाता सूची में उनका दूसरा नाम था जबकि वे अमुक नाम से पहचाने और जाने जाते हैं। इसलिए उनके नाम में संशोधन कर दिया जाए। इसी आधार पर नामों में आंशिक संशोधन कर दिया जाता है। क्या इसका कोई नियम है? श्री पाण्डेय बताते हैं कि कोई नियम नहीं है परन्तु यह परम्परा रही है। कब से शुरू हुई, मैं नहीं बता सकता मगर 30-35 साल से मैं ही देख रहा हूँ।ड्ढr नाम परिवर्तन को निर्वाचन आयोग मान्यता नहीं देता। निर्वाचन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि नाम परिवर्तन मतदाता सूची में होना चाहिए। उसकी पूरी प्रक्रिया है। विधायक बाद में अपना नाम चाहे कुछ भी बदल ले, उसके क्या मायने? विधायक का प्रमाणपत्र तो मतदाता सूची में दर्ज नाम पर ही जारी होता है।ड्ढr आखिर, फिर विधायक नाम बदलने के लिए क्यों उतावले हैं? जाति की बुनियाद पर टिकी प्रदेश की राजनीति के इस चेहर का राज खोलने को कोई भी तैयार नहीं है। कई विधायकों से बात की गई मगर सभी का एक सा ही जवाब था कि कोई खास मतलब नहीं है। बस मतदाता सूची में पूरा नाम नहीं आया था। इसलिए विधानसभा अभिलेखों में नाम पूरा करा दिया जाता है ताकि पत्र व्यवहार या पहचान में कोई दिक्कत न हो। भाजपा के नेता तथा संसदीय मामलों के जानकार हृदय नारायण दीक्षित बताते हैं कि अगर मतदाता सूची बनते समय ही सावधानी बरती जाए तो बाद में नाम में संशोधन करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।ड्ढr चुनाव प्रचार की व्यस्तता के कारण जनप्रतिनिधि अधिक ‘पेन’ नहीं लेता और जो नाम मतदाता सूची में रहता है, उसी पर नामांकन कर देता है। राजनीति के चतुर खिलाड़ी विधायकों के तर्को को दूसर रूप में देखते हैं क्योंकि नाम परिवर्तन कराते समय अधिकांश जनप्रतिनिधि अपने नाम में जातिसूचक शब्द जुड़वा रहे हैं जबकि चुनाव लड़ते समय उनके नाम के साथ जाति का नाम नहीं जुड़ा था। यह जनप्रतिनिधियों की बाजीगरी है कि चुनाव लड़ते समय वे किसी एक जाति का होने का संदेश नहीं देना चाहते हैं क्योंकि इससे दूसरी बिरादरी का वोट मिलने में दिक्कत होगी। बाद में अपने असली रूप में आ जाते हैं।ं

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