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सूबे में पोलियो वायरस की गंभीरता कम हुई

बिहार में इस वर्ष मिले सर्वाधिक पोलियो मरीजों की संख्या के बाद भी उन्मूलन की संभावना बढ़ गयी है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पोलियो वायरस का प्रभाव कमजोर पड़ चुका है। ऐसे में जो वायरस यहां पाए गए हैं वे कम खतरनाक हैं। इन पर काबू पाना आसान है। इंडियन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक (आईएपी) द्वारा पोलियो उन्मूलन के लिए आयोजित संगोष्ठी में यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों का कहना था कि राज्य में इस वर्ष पोलियो वायरस की गंभीरता कम हुई है।ड्ढr ड्ढr यूनिसेफ के पोलियो कार्डिनेटर डा. अनिसुर्ररहमान सिद्दीकी ने बताया कि बिहार में पी-1 वायरस का प्रसार थम गया है। इस वर्ष अभी तक सिर्फ एक बच्चा इससे पीड़ित हुआ है। डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय समन्वयक डा. देवेद्र खण्डेत ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष पोलियो वायरस के चेन में काफी गिरावट आई है। अभियान में जुटी एजेंसियों के लिए यह संतोषजनक स्थिति का संकेत है। आईएपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. उत्पलकांत सिंह ने पोलियो उन्मूलन के लिए नियमित टीकाकरण अभियान को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण का कवरज बढ़ाकर पोलियो वायरस को नियंत्रित किया जा सकता है। इस मौके पर आईएमए के महासचिव और शिशु रोग विशेषज्ञ डा.अरुण कुमार ठाकुर ने कहा कि वैज्ञानिक तथ्य है कि पहले पी-2 वायरस जाता है। इसके बाद पी-1 और अन्त में पी-3 वायरस का उन्मूलन होता है। आईएपी के पूर्व उपाध्यक्ष डा. एस.ए. कृष्णा ने बताया कि पोलियो उन्मूलन के लिए कुपोषण और स्वच्छता पर भी जोर दिया जाना चाहिए। यूनिसेफ के डा. सेरीन वर्की और डा. एस.पी. श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे। संगोष्ठी में आए लोगों ने अभियान की सफलता के लिए अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन आईएपी के सचिव डा. ए.के. जायसवाल ने किया।

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