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मैदान में थप्पड़

क्रिकेट के मैदान में अब बल्ले की ही नहीं, थप्पड़ की गूंज भी सुनाई देने लगी है। आईपीएल में मारपीट की कसर बाकी थी, सो वो भी पूरी हो गई। मुंबई इंडियन और किंग्स इलेवन के मैच के बाद खिसियाए हरभजन ने प्रतिद्वंद्वी श्रीसंत को चांटा जड़ दिया। भद्रजनों के खेल में ऐसे अभद्र व्यवहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। भज्जी का मिा वैसे ही गर्म है, मुम्बई टीम की लगातार तीसरी पराजय ने रही-सही कसर पूरी कर दी। सचिन की अनुपस्थिति में अपनी टीम की कप्तानी का बोझ उठा रहे इस फिरकी गेंदबाज के पास शायद श्रीसंत की जुबान से निकले बाउंसरों का बोझ उठाने जितना धर्य नहीं था। बात का बतंगड़ बन गया और श्रीसंत थप्पड़ खा बैठा। घटना पर अब हाय-तौबा मची हुई है। किंग्स के कोच मूडी के मुताबिक हरभजन की गलती नाकाबिले बर्दाश्त है। बोर्ड के एक आला अधिकारी ने जांच का भरोसा दिलाया है। इस बार हरभजन के बचाव में कुछ कहना कठिन है। आस्ट्रेलिया दौर के दौरान उस पर नस्ली टिप्पणी करने का आरोप लगा था और तब टीम इंडिया ही नहीं, पूरा देश उसके साथ था। यूं तो श्रीसंत भी भड़काऊ हरकतों के लिए खासा कुख्यात है, लेकिन इस बार अपने वरिष्ठ साथी भज्जी से भिड़ना उसके लिए महंगा साबित हुआ। क्रिकेट के खेल में जसे-ौसे पैसे का प्रभाव बढ़ रहा है, खिलाड़ियों का रवैया और भी आक्रामक होता जा रहा है। प्रदर्शन के साथ करोड़ों रुपए का दाव लगा होता। आईपीएल में तो गेंदबाजों और बल्लेबाजों की बोली सीधे-सीधे उनकी सफलता और विफलता से जुड़ी होती है। बीस-बीस ओवर के मैच में संभलने का मौका तक नहीं मिला। भज्जी और श्रीसंत के बीच मारपीट की नौबत आना विनाशकारी संकेत है। क्रिकेट के अत्याधिक व्यावसायिक और सब कुछ बाजार की ताकतों के हाथ में सौंप देने पर ऐसी शर्मनाक घटना होना स्वाभाविक है। आयोजकों को मोहाली की घटना को गंभीरता से लेकर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। जांच के बाद ही दूध का दूध, पानी का पानी होगा, किंतु तब तक हरभजन को मैदान से बाहर बैठाना जरूरी है। लीपा-पोती करने से मैदान में हिंसा को बढ़ावा ही मिलेगा।

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