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सरकार नर्म, पर आतंकियों की मंशा पर शक

नई सरकार ने कहा था कि वह आतंकवादियों से बातचीत का रास्ता अपनाएगी। वजीरिस्तान के सबसे बड़े आतंकवादी या पाकिस्तान के सबसे खतरनाक आतंकवादी बैयतुल्ला महसूद के दुलारे, मौलवी उमर, ने दि नेशन को बताया, उनकी जो बात नई सरकार से हो रही है उसमें सफलता मिल रही है। बैयतुल्ला महसूद तहरीक-ए-तालिबान के मुखिया हैं और अलकायदा से सीधा संबंध है। इसके खिलाफ बेनजीर भुट्टो के कत्ल का केस दर्ज है और कहा जाता है कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवाद की घटना होती है तो किसी न किसी तरह इसके तार इस आदमी से जुड़े हुए पाए जाते हैं। अब इसने वजीरिस्तान में अपना फरमान जारी किया है जिसमें उसने अपने साथियों को सख्त शब्दों में कहा हे कि सब आतंकवादी गतिविधियां बंद कर दी जाएं और जो इसका उल्लंघन करंगे उन्हें सर आम फांसी देकर उल्टा लटकाया जाएगा। हम अपनी तरफ से जंगबंदी का ऐलान करते हैं ताकि बातचीत से सारी अड़चनें सुलझा दी जाएं। इस बात का फौा और सरकार ने अभिनंदन किया है। फौा की तरफ से मेजर जनरल अब्बास ने कहा कि अगर यह लोग अपनी कार्रवाई खत्म करते हैं, बहुत अच्छा है। परंतु हमार पास इसका कोई लिखित संदेश नहीं है। क्या यह ईमानदारी का फैसला है या फिलहाल के लिए चाल है जिसमें तालिबान और अलकायदा वाले अपने आपको पाकिस्तान की सीमा भी फिर संगठित करके अफगानिस्तान में हमले तेज कर दे। पिछले साल जब इन लोगों ने पाकिस्तान का एक हेलीकॉप्टर गिराया था, जिसमें एक जनरल और तीन ब्रिगेडियर मार गए थे तो उसके बाद एक तरफ जंगबंदी का बयान दिया था। परन्तु फिर भी इनकी गतिविधियां जारी रही। अपने सम्पादकीय में दि नेशन ने लिखा है अगर यह खबर कि फाता और उत्तर पश्चिमी सीमाप्रांत में बेयतुल्ला के तालिबानी बातचीत करने पर राजी हैं तो यह नई सरकार की एक और बड़ी सफलता है। इस सिलसिले में सरकार ने तहरीक-ए-निफाज-ए-शहरीयत के लड़ाकू नेता सूफी मोहम्मद को रिहा कर दिया, जब इसने हिंसा छोड़ने का वायदा किया। सरकार ने अपनी नई नीति के चलते दूसर नेताओं को भी छोड़ना शुरू कर दिया है। बलूचिस्तान सरकार ने कहा है कि वह बलूचिस्तान नेशनल पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री सरदार अख्तर मेहंगल के खिलाफ सभी केस को वापिस लेने का फैसला किया है। मेहंगल को 2006 में 700 राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था। इनके खिलाफ देशद्रोह का भी आरोप है। इसी तरह सिंध सरकार ने सफदर सिकरी के खिलाफ भी आरोप वापिस ले लिए। फिर भी आतंकवादी घटनाएं जारी हैं। पेशावर के नजदीक एक गैर सरकारी एजेंसी जो महिला डॉक्टरों और नर्सो को प्रशिक्षित कर रही थी, उसके एक आफिसर और ड्राइवर को पहले अगवा कर लिया। इसके अलावा दो रडक्रास के कार्यकर्ताओं को अगवा कर लिया। पाकिस्तान के अफगानिस्तान में राजदूत तारिक अजीमुद्दीन को फरवरी में अगवा किया गया था उनको अभी तक छोड़ा नहीं गया। आतंकवादियों ने उन्हें छोड़ने के लिए 50 करोड़ रुपए और 10 आतंकवादियों को छोड़ने की फरमाइश कर दी है जिसमें बेनजीर के कत्ल के तीन आरोपी भी शामिल हैं। सरबजीत सिंह का परिवार पाकिस्तान पहुंच गया और बिछड़े हुए 18 साल के बाद आपस में मिले। अब पूर्व मंत्री और मानवाधिकार की संस्था से जुड़े हुए अंसार बरनी ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को एक लिखित याचिका दी जिसमें प्रार्थना की गई है कि सरबजीत को रिहा कर दिया जाए या कम से कम उसकी सजा उमर कैद में बदल दी जाए। राष्ट्रपति फैसला तब लेंगे जब सरकार अपनी सिफारिश ोज दे। स्पष्ट है कि यह सिफारिश और राष्ट्रपति की माफी महीने के अंत तक हो जानी चाहिए। नवाए-वक्त ने लिखा है कि ब्रिटेन में भारतीय ग्रुप बड़ा ताकतवर है। इसमें उसने पार्लियामेंट के सदस्य श्री वीरन्द्र शर्मा का नाम लिया। पाकिस्तान में काफी फांसियां होती है। इस समय 7200 लोग फांसी के इंतजार में हैं। मुशर्रफ की विदेश यात्राएं पाकिस्तानी संसद में पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के राजा मुहम्मद असद खान के विदेशी दौरों पर एक लिखित प्रश्न के उत्तर में विदेशमंत्री शाह महमूद कुरशी ने बताया कि 2003 से 2008 तक मुशर्रफ 201 दिन विदेश में रहे यानी हर पचास दिन में एक यात्रा जिसमें 45 देश शामिल हैं। इसमें अधिकतर यात्राएं सऊदी अरब और अमेरिका की थीं। इन यात्राओं का कुल खर्च 1468 करोड़ रुपये बताया गया। हालांकि इस प्रश्न को और नहीं खींचा गया। लेकिन लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर इतनी यात्राओं की क्या जरूरत थी और क्यों इतना ज्यादा पैसा खर्च किया गया।ं

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