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सुराज तो आपकी जिम्मेदारी थी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इस वर्ष भी 21 से 30 अप्रैल 2008 तक ग्रामीण जनता की सुख सुविधा के लिए ग्राम सुराज अभियान शुरू किया है। दरअसल बात यह है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह उचित रूप से नहीं कर पाए हैं। फिर सुराज केवल ग्रामों में ही क्यों..? राजधानी और शहरों में भी क्यों नहीं..? राजधानी मे ही नाक के नीचे जनता पानी, सफाई, बिजली, सड़क जसी जरूरतों की कमी से जूझ रही है। शिकायतें मिलने के बाद भी वर्षो से इनका आज तक निराकरण नहीं हुआ है।ड्ढr विजय लोढ़ा, ‘ओम शांति’, छत्तीसगढ़ नीतिहीनों की कैसी नीति ‘महंगाई पर हल्ला मचाने तक नहीं आए कई सांसद’ पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। विश्व के इस सबसे बड़े प्रजातांत्रिक देश की संसद में दशकों पूर्व जमीन से जुड़े, जनसेवा की भावना से ओतप्रोत एसे लोग चुनकर आते थे, जिनके दिल में अपनी जनता के लिए दर्द रहता था। वे जनता के सुख-दुख का हिस्सा बनते थे। इसलिए उनको जनता को होने वाली तमाम तरह की तकलीफों का अंदाजा था। आज तो संसद, विधानसभा में चुनकर जाने वाले प्रतिनिधियों में से कई तो पहले ही जघन्य अपराधों में लिप्त हैं। क्या यह लोकतंत्र का एक काला अध्याय नहीं कहलाएगा, जब उसके जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक घूस लेते कैमर के सामने में पकड़े गए। लोकतंत्र में जनता प्रतिनिधियों को नहीं, नीतियों को मत देती है। परन्तु उन लोगों से किसी नीति की अपेक्षा कैसे की जा सकती है, जो स्वयं नीतिहीन हैं।ड्ढr निधि, जे-61ए, रमेश नगर, नई दिल्ली बात करै गजराज की ..! कुछ दिन पूर्व समाचार पत्र में सीनियर सिटिान कार्ड के बार में छपा था। विज्ञापन में एक सीनियर सिटिान के हाथ में सुन्दर सा कार्ड था। इस कार्ड के जरिए कार्डधारक सीनियर सिटिान्स को चिकित्सा, आवास, भोजन जसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पर समाज कल्याण विभाग वाले सीनियर सिटिान्स के वोटर आईडी कार्ड में ही एक छोटा-सा सीनियर सिटिान का मोनोग्राम लगा कर टरका रहे हैं। बहुत पहले पढ़ा था- ‘बात करी गजराज की, और दिखायो बैल’ आज देख भी लिया। समाज कल्याण मंत्री कहते हैं कि इस मोनोग्राम से उन्हें सीनियर सिटिान होने की स्वीकृति मिल गई है।ड्ढr यू. सी. पांडे, सेक्टर-10, द्वारका, नई दिल्ली आम आदमी से खतरा क्यों? दिल्ली में आए दिन इंडिया गेट के आसपास सरकारी आयोजन होते हैं या धार्मिक जुलूस या राजनीतिक जलसे होते हैं। और एसे में सबसे पहले सार्वजनिक बसों को निर्धारित मार्ग से परिवर्तित कर दिया जाता है। हालांकि इस दौरान उन्हीं मार्गो पर निजी वाहन कार, स्कूटर, टैक्सी, ऑटो फर्राटे से दौड़ रहे होते हैं। हाल ही में ओलंपिक मशाल वाले दिन हमें यमुनापार से डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल जाना था। डीटीसी वाले ने आईटीओ से दिल्ली गेट फिर अजमेरी गेट होते हुए पहाड़गंज में लाकर हमें छोड़ दिया। अब वहां से अस्पताल तक पैदल ही जाना पड़ा। बीमार और बुजुर्गो की परशानी का सहा ही अंदाजा लगाया जा सकता है। राजपथ पर मात्र आधे घंटे का आयोजन था, इसके लिए पूर आठ घंटे तक रास्ते बंद रखे गए। अच्छा हो यदि एसे आयोजन राष्ट्रपति भवन के अहाते में ही करा लिए जाएं। कम से कम आम आदमी को दिक्कत तो न हो।ड्ढr पुष्पा पाल, 684, इन्द्रापार्क, नई दिल्लीं

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