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कनेक्शन घटने से बीएसएनएल चिंतित

अपने लाखों उपभोक्ताओं को खो देने के बाद भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएमएल)के होश उड़ गए है। अब उसे समझ आ रहा है कि अपनी सर्विस को और चुस्त किए बिना उसका बेहद प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम सेक्टर में टिके रहना मुमकिननहीं होगा। बीएसएनएल के डायरक्टर (फाइनेंस) एस.डी.सक्सेना ने कहा कि वे अपनी सर्विस को बेहतर बना रहे हैं। इस बार में विभागीय स्तर पर मंथन के दौर चल रहे हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों को तुरंत दूर किया जा रहा है। उनका यह भी कहना था कि उनके कई फिक्स्ड कनेक्शन कटवाने वाले मोबाइल पर शिफ्ट हो जाते हैं। सनद रहे कि पिछले साल 2007-08 (2रवरी तक) के दौरान बीएसएनएल के 4-4 लाख फिक्स्ड और मोबाइल कनेक्शन सरंडर हुए। आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा फिक्स्ड लाइन कटवाई गईं । उसके बाद क्रमश: महाराष्ट्र और तमिलनाडू का स्थान रहा। उधर, राजस्थान में मोबाइल कनेक्शन सर्वाधिक सरंडर हुए। सक्सेना ने कहा कि वे भी उन उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट देते हैं जो बिल की अदायगी निश्चित अवधि के बीच नहीं करते। जबकि प्राइवेट आपरटर अपने उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने में जल्दी नहीं करते। सूत्रों ने बताया कि कनेक्शन सरंडर करने वालों की तादाद में तेजी ने बीएसएनएल मैनजमेंट की पेशानी से पसीने छुड़वा दिए हैं। उसने कारणों को जानने के लिए एक निजी कंपनी की सेवाएं भी लीं। उसने 45 शहरों में बीएसएनएल कस्टमरों से बातचीत करने पर पाया कि कनेक्शन कटवाने वाले 20 प्रतिशत बिल देने में डिफाल्टर निकले। 25 फीसदी का कहना था कि बीएसएनएल का मंथली रंट काफी अधिक है। 18 प्रतिशत के पास बीएसएनएल के एक से अधिक कनेक्शन थे। उन्होंने अपना एक कनेक्शन सरंडर करवा दिया। उधर,ाानकारों का यह भी कहना है कि जिन-ािन जगहों पर बीएसएनएल सर्विस दे रही हैं, वहां पर प्राइवेट प्लेयर्स बहुत मजबूती के साथ उसके कस्टमरों को बेहतर सर्विस देकर तोड़ रहे हैं। इनमें टाटा, रिलायंस और भारती एयरटेल खास हैं। भारती एयरटेल के एक अधिकारी ने कहा कि अब किसी कंपनी का फोन सरंडर करके दूसरी कंपनी से जुड़ जाना आम बात हो गई है।

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