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प्रभु के चढ़ावे में आतंकियों का हिस्सा

ाब धन उगाही की बारी आती है तो मणिपुर के उग्रवादी किसी को नहीं बख्शते। भगवान को भी नहीं। पूर भारत में परंपरागत रूप से मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के सामने लगनेवाले भोग या प्रसाद पर अधिकार उस मंदिर के पुजारी का होता है। मणिपुर में मैतेई समुदाय में भी यही परंपरा है। यहां अधिकांश मैतेई वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी हैं। लेकिन इन मंदिरों के प्रसाद पर अब राज्य में सक्रिय उग्रवादी गुटों की नजर गड़ी हुई है। राज्य में इस समय ज्ञात तौर पर 17 उग्रवादी गुट सक्रिय हैं और इन गुटों ने प्रसाद को अपने उगाही के जरिए में शामिल कर लिया है। उग्रवादी अब पुजारियों से भगवान के चढ़ावे में से अपना हिस्सा मांग रहे हैं। इसका परिणाम यह निकला कि पुजारियों और मंदिरों के प्रबंधन ने इस अतिरिक्त बोझ को भक्तों पर डालना शुरू कर दिया। अब मंदिरों के चढ़ावे में तो बढ़ोतरी हो गई है, लेकिन उनकी आय कम हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि इस तथ्य को किसी और ने नहीं, स्वयं मुख्यमंत्री ई. इबोबी सिंह ने स्वीकार किया है। उन्होंने कहा, ‘मणिपुर में मंदिरों में भगवान के चढ़ावे और दान में से उग्रवादी जबर्दस्ती हिस्सा वसूल रहे हैं।’ मुख्यमंत्री के अनुसार, मंदिर समितियों ने पहले मंदिरों में दर्शन के लिए 30 रुपये प्रति भक्त वसूलने का नियम तय किया था। लेकिन अब वे प्रति भक्त 50 रुपये वसूल रहे हैं और इसमें से 5 से 10 प्रतिशत तक उग्रवादियों को कमीशन दे दिया जाता है। मंदिरों से वसूली की इस वारदात का खुलासा अचानक तब हुआ, जब पिछले हफ्ते राज्य की कानून-व्यवस्था की गिरती हालत का जायजा लेने केंद्रीय टीम इंफाल पहुंची। केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिव के.एम. चंद्रशेखर की अध्यक्षता में इस साल टीम का यह चौथा मणिपुर दौरा है। मंदिरों से इसी तरह की वसूली की वारदातों की खबर वाम मोर्चा शासित त्रिपुरा से भी जोर-शोर से आ रही हैं।

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