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लेफ्ट का तरकश भरा, पर धनुष टूटा

महंगाई पर लगाम कसने के लिए वाम दलों के सुझावों को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा ठुकरा दिए जाने के बाद संसद के भीतर व बाहर सरकार से टकराव मोल लेने केवाम दलों के विकल्प काफी कम हो गए हैं।प्रधानमंत्री के रुखे व्यवहार के बाद वाम नेताओं ने भले ही चेतावनी दी है कि सरकार को अभी संसद में वित्त विधेयक पारित करवाना है। लेकिन क्या वाकई वाम दल इस चेतावनी पर जरा भी गंभीर हैं? इसका कोई अंदाजा अभी तक नहीं मिला है। इन सवालों का जवाब पाने के लिए कोलकाता में 20 अप्रैल को होने वाली पोलित ब्यूरो की बैठक का इंतजार करना होगा। इस बीच प्रधानमंत्री द्वारा वाम महंगाई पर वाम नेताओं को बैंरग लौटाने के घटनाक्रम पर विचार के लिए चारों वाम दलों की संसदीय नेताओं की सोमवार को बैठक होगी, जिसमें बदले हालात में संसद में अपनाई जाने वाली रणनीति पर विचार किया जाएगा। हालांकि वाम दलों के रुख से लगता है कि प्रधानमंत्री व कांग्रेस के रुख से सख्त नाराजगी के बावजूद वे इस मौके पर यूपीए सरकार गिराने के लिए भाजपा व सहयोगी दलों के साथ वोट नहीं करने वाले। लेकिन लोकसभा का जो आंकड़ा हैं, उस हिसाब से वाम दल व यूनपीए महंगाई के विरोध में वित्त विधेयक का समर्थन करने के बजाय विरोध में वायकाट भी करते हैं तो भी कांग्रेस के प्रबंधकों की नजर में सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं दिखता। लेकिन शुक्रवार को वाम नेताओं के डिलिगेशन में प्रधानमंत्री से मुलाकात करने गए फारवर्ड ब्लाक नेता देबव्रत बिश्वास ने नारागी भर लहो में हिंदुस्तान से कहा अब सवाल यह है कि इस सरकार की नीयत के बार में वाम दलों को अब सतर्क हो जाना चाहिए। क्यों इसे समर्थन देने के बाद भी हम सरकार की नीतियों मे बदलाव नहीं ला पाए तो इससे पूर देश में वामपंथी ताकतों के आंदोलन को गहरा धक्का लगेगा। इधर लोकसभा में वित्त विधेयक पर शुक्रवार को चर्चा आंरभ हो चुकी है। सस्ते गल्ले की दूकानों से सबको सस्ता राशन,वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाने, आवश्यक उपभोक्ता कानून को कड़ा बनाने और जमाखोरी रोकने के वाम सुझावों में भले ही काफी वजन दिखाई देता है लेकि न अब तय भी तय है कि सरकार व वाम दलों के बीच अविश्वास अब और बढ़ने जा रहा है। माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात कहती हैं कि सरकार अपना काम करगी और हम अपना। जब चुनाव आएंगे तो जनता खुद जवाब देगी।

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  • Web Title: लेफ्ट का तरकश भरा, पर धनुष टूटा