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डॉ. परशुराम के विरोधी खेमे को लगा एक और झटका

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में चल रही उठापटक के बीच अध्यक्ष डॉ. परशुराम पाल के विरोधी खेमे को एक और झटका लगा है। कैबिनेट से पास नहीं होने के कारण सदस्यों का कार्यकाल दो से पांच साल होना फिलहाल संभव नहीं। खास यह कि कैबिनेट की अगली बैठक से पहले वर्तमान सदस्य व पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. आशाराम यादव और एक अन्य सदस्य मनोज यादव का कार्यकाल चार फरवरी को समाप्त हो जाएगा।


दरअसल पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. आशाराम ने अपने समय में सदस्यों का कार्यकाल दो से बढ़ाकर पांच साल करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। टीजीटी-पीजीटी और प्रिंसिपल भर्ती की प्रक्रिया लटकने के कारण कुछ सदस्य शासन पर कार्यकाल बढ़ाने का दबाव बना रहे थे क्योंकि चयन बोर्ड की नियमावली में कोई भी संशोधन कैबिनेट के जरिए ही संभव है।

लेकिन पिछले दिनों अध्यक्ष डॉ. परशुराम पाल को उनके चैम्बर में ही बंधक बनाकर इन सदस्यों ने अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मार ली। क्योंकि अध्यक्ष यदि संस्तुति करते तो शायद सदस्यों के कार्यकाल बढ़ाने संबंधी प्रस्ताव कैबिनेट तक पहुंच भी जाता। लेकिन सदस्यों के र्दुव्यवहार से दुखी अध्यक्ष ने इसमें रुचि नहीं ली लिहाजा प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया।

परीक्षा के बीच में चले जाएंगे दो सदस्य
कार्यकाल नहीं बढ़ने के कारण दो सदस्य टीजीटी-पीजीटी 2013 की लिखित परीक्षा के बीच ही कार्यमुक्त हो जाएंगे। दरअसल प्रशिक्षित स्नातक और प्रवक्ता भर्ती 2013 की परीक्षा 25 जनवरी से 22 फरवरी के बीच होनी है। जबकि डॉ. आशाराम यादव और मनोज यादव का कार्यकाल 4 फरवरी को पूरा हो रहा है। इसलिए माना जा रहा है कि अध्यक्ष इन दो सदस्यों को परीक्षा से जुड़ा बहुत जिम्मेदारी का काम नहीं सौपेंगे।

अध्यक्ष को बंधक बनाए जाने की निंदा
माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट ने चयन बोर्ड अध्यक्ष डॉ. परशुराम पाल को बंदी बनाए जाने की निंदा की है। जिलाध्यक्ष जंग बहादुर पटेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि चयन बोर्ड में हुई यह घटना उसकी अस्मिता के साथ खिलवाड़ है। अध्यक्ष को बंदी बनाकर प्रधानाचार्य पद का साक्षात्कार कराए जाने का दबाव बनाया जा रहा है जो कि अनुचित है। शासन को अनुशासनात्मक कार्यवाही करना चाहिए। प्रांतीय सदस्य डॉ. शैलेश कुमार पांडेय ने कहा कि कुछ सदस्य फरवरी में सेवानिवृत्त हो रहे हैं और व्यक्तिगत स्वार्थो की पूर्ति के लिए अध्यक्ष पर अनावश्यक रूप से दबाव बना रहे हैं। बैठक में डॉ. जय प्रकाश शर्मा, जगदीश प्रसाद, डॉ. वातात्मज मिश्र, महेशदत्त शर्मा, कुंज बिहारी मिश्र आदि ने विचार रखे।

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