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अधिकांश राज्य आयोग के पुनर्गठन के पक्ष में: जेटली

अधिकांश राज्य आयोग के पुनर्गठन के पक्ष में: जेटली

केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि अधिकतर राज्य योजना आयोग के स्थान पर एक नयी संस्था के पक्ष में हैं और नये ढांचे में अपनी अधिक भूमिका चाहते है।

योजना आयोग के स्थान पर नयी संस्था के संबंध में विचार विमर्श के लिए रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद जेटली ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि तीन-चार राज्यों को छोड़कर अन्य राज्य नयी संस्था के पक्ष में थे। उन्होंने बताया कि राज्यों का कहना है कि अधिकार और योजना का विकेन्द्रीकरण करने की जरूरत है। उनका यह कहना भी था कि संघीय ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।

यह पूछे जाने पर कि नयी संस्था कब तक गठित हो जायेगी, जेटली ने कहा कि अभी इसके लिए कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गई है।

उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल अधिकतर मुख्यमंत्रियों की राय थी कि नयी संस्था की नींव संघीय ढांचे के साथ अधिक सहयोग की होनी चाहिए। जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह मानना है कि योजना बनाने की प्रक्रिया में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में हो रहे विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने के लिए योजना आयोग की भूमिका पर नये सिरे से देखने की जरूरत है।

कैसी होगी नई संस्था?
नए संस्थान में प्रधानमंत्री पदेन अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा 8 या 10 नियमित सदस्य,केंद्र व राज्यों के प्रतिनिधि व विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ नई संस्था में शामिल हो सकते हैं। नई संस्था सरकारी विभाग के कामकाज की निगरानी करके उसके काम का मूल्यांकन के आधार पर राशि का आवंटन का प्रस्ताव करेगी। पंचवर्षीय योजना तैयार होंगी या नहीं इस पर राज्यों की अलग अलग राय है यह भी तय होगा।

क्या होगा फायदा?
राज्यों को अपनी जरूरत के मुताबिक योजना बनाने में मदद मिलेगी। केंद्रीय योजनाओं को उनपर थोपा नहीं जाएगा। तर्क यह है कि हर राज्य अपनी जरूरतों के मुताबिक योजनाएं बनाएं। उन्हें राशि भी जरूरत और काम के मुताबिक ही मिलेगी। कई बार राज्य केंद्रीय योजनाओं का पैसा खर्च नहीं कर पाते। लेकिन खुद ही योजना बनाएंगे और परफार्मेस के आधार पर पैसा मिलेगा तो उनपर सही तरीके से धनराशि खर्च करने का दबाव होगा।

क्यों पड़ी जरूरत?
वर्ष 1992 में उदारीकरण का दौर शुरु होने पर और बाद में यूपीए सरकार में भी बदलाव का खाका पेश किया गया था। योजना आयोग 64 साल पुराने ढर्रे पर चल रहा था। योजनाओं में अडंगा लगाने वाली संस्था की छवि बन रही थी। मंत्रालयों की कई योजनाओं पर योजना आयोग ब्रेक लगा देता था, इससे देरी होती थी। नीतिगत मसलों पर समेकित ढांचे के बजाए केंद्र,राज्य व योजना आयोग अलग अलग खड़े नजर आते थे। निजी क्षेत्रों की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। अब उनकी चिंताओं को भी जगह मिलेगी।

योजना आयोग का सुझाव
योजना आयोग ने सुझाव दिया है कि नई संस्था बदलती आर्थिक जरूरतों को पूरा करने वाला हो और इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ व राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हों। इसमें 8 से 10 नियमित या कार्यकारी सदस्य हो सकते हैं जिनमें से आधे राज्यों के प्रतिनिधि हों। इसके अलावा यह नॉलेज हब शोध संस्थान के रूप में काम करेगा।

योजना आयोग की जगह नई संस्था में राज्यों की भागीदारी ज्यादा होगी। केंद्र के साथ राज्य सरकारों को भी योजना निर्माण में हिस्सेदारी का मौका मिलेगा। वित्तीय मसलों पर भी राज्यों की सोच व जरूरतों का ख्याल रखा जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी की  अध्यक्षता में रविवार को दिल्ली में राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में यह खाका उभरकर सामने आया।

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ज्यादातर राज्य संघीय ढांचे की मजबूती, राज्यों को ज्यादा अधिकार देने, योजनाओं को राज्यों की जरूरत के मुताबिक उनकी सहमति से तैयार करने जैसे मसलों पर सहमत हैं। नए निकाय का ढांचा ऐसा होगा जिसमें केंद्र, राज्य व आयोग एक टीम के रूप में काम करें। नया निकाय कब तक बन जाएगा इसकी समयसीमा तय नहीं की गई है। वित्तमंत्री ने कहा कि योजना आयोग तब बना था जब नियंत्रित अर्थव्यवस्था का दौर था। लेकिन अब राज्यों के साथ निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। नए ढांचे में इसे ध्यान में रखा जाएगा।’

वित्तमंत्री के मुताबिक चार राज्यों के मुख्यमंत्री यह चाहते थे कि मौजूदा ढांचे के अंतर्गत ही सुधारों को लागू किया जाए। ममता बनर्जी के बैठक में न आने पर पूछे गए सवाल पर वित्तमंत्री ने कहा कि उन्होंने एक पत्र प्रधानमंत्री को लिखा है। इसमें राज्यों की मजबूती, सत्ता के विकेंद्रीकरण और जो ढांचा बने वह वैधानिक हो, जैसे मसले उठाए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि नए निकाय में राज्यों की बड़ी भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों के विकास के बिना देश का विकास असंभव है। पीएम ने नए निकाय में टीम इंडिया की झलक दिखने की जरूरत बताई।

ममता, उमर और हेमंत सोरेन नहीं आए : बैठक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली,ज्यादातर राज्यों के मुख्यमंत्री व योजना आयोग के अधिकारी शामिल थे। योजना आयोग की सचिव ने बैठक में एक प्रेजेंटेशन दिया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जगह उनके वित्तमंत्री शामिल हुए। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला की जगह वहां के अधिकारियों ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

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