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विदेशी चने, मक्का, गेहूं खाने का शौकीन था यादव सिंह

विदेशी चने, मक्का, गेहूं खाने का शौकीन था यादव सिंह

प्राधिकरणों के जरिए अकूत संपत्ति इकट्ठा करने वाला यादव सिंह खाने-पीने का भी बड़े शौकीन हैं। उनके कार्यालय में बाकायदा एक रसोई चलती है। इसमें चाय-कॉफी के अलावा तमाम व्यंजन बनते हैं। भुने दाने मांगते ही उनका स्टाफ समझ जाता था कि कोई करीबी व्यक्ति मिलने आया है। ये भुने चने, मक्का, गेहूं और दालें विदेशी कंपनियों से मंगवाए जाते थे।

यादव सिंह अपने खाने-पीने का बड़ा ख्याल रखते हैं। प्राधिकरण स्थित उसके कार्यालय, सरकारी बंगले और निजी आवास में रसोईयां चलती हैं। प्राधिकरण के खर्चे पर तीनों जगह स्टाफ तैनात हैं। यादव सिंह कॉलेस्ट्रॉल रहित अनाज के दानों के बड़े शौकीन हैं। अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई मक्का और कनाड़ा की कंपनियों के चने से बने उत्पाद उसके लिए मंगवाए जाते थे। खास तौर से रोस्टेड अनाज और दालों के दाने उन्हें बेहद पसंद हैं। जब कोई करीबी उसके पास आता और उन्हें आराम से बातचीत करनी होती तो चाय-कॉफी के साथ भुने दानों का दौर चलता था। कार्यालय और घर का स्टाफ भुने दानों की मांग से ही अंदाजा लगा लेता था कि साहब के पास बैठा व्यक्ति उनका खास है।


नोएडा विकास प्राधिकरणों में रिश्तेदारों की फौज है

यादव सिंह विकास प्राधिकरणों में अकेले सर्वेसर्वा नहीं है। उसके रिश्तेदारों की फौज भी बैठी है। फिलहाल यादव सिंह का बेटा ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में बतौर मैनेजर तैनात है। उसके पास प्राधिकरण के महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा है। बसपा सरकार के दौरान यादव सिंह का करीबी रिश्तेदार ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरणों में बतौर विशेष कार्याधिकारी तैनात रहा।

बसपा सरकार के अंतिम महीनों में नोएडा और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण में भर्तियों का दौर शुरू किया गया था। जिसमें यादव सिंह के बेटे सनी यादव को ग्रेटर नोएडा में बतौर मैनेजर नियुक्ति दी गई। हालत ऐसी रही कि किसी को पता भी नहीं लगा कि कब नियुक्तियां निकाली गईं और कब भर्ती कर ली गई। जब से यादव सिंह के घर आयकर वालों का छापा पड़ा है, तब से सनी यादव भी कार्यालय से गैर हाजिर चल रहा है। सनी यादव का सुसर (यादव सिंह) के समधी प्रवेंदर सिंह को ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरणों में ओएसडी बनाकर प्रतिनियुक्ति पर लाया गया था। उसके पास दोनों प्राधिकरणों की निर्माण परियोजनाएं थीं। उसने करीब चार साल के अपने कार्यकाल में 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के टेंडर छोड़े थे। बसपा सरकार के जाते ही अखिलेश यादव सरकार ने प्रवेंदर की प्रतिनियुक्त समाप्त कर दी थी। प्रवेंदर सिंह को वापस मूल विभाग यूपी आवास विकास परिषद में भेज दिया गया था। ग्रेटर नोएडा के प्लानिंग डिपार्टमेंट और नोएडा के इंडस्ट्री डिपार्टमेंट में भी यादव के आधा दजर्न रिश्तेदार काम कर रहे हैं।

दहेज में बांटी गई हैं नौकरियां
यादव सिंह की सिफारिशों पर प्राधिकरणों में करीब 50 युवक-युवतियों को नौकरियां मिली हैं। प्राधिकरणों में बड़े पदों पर बैठे अफसरों, सरकार में मंत्री, विधायकों और सांसदों ने अपने बेटे-बेटियों से शादियां करके इन सबको प्राधिकरणों में नौकरियां दी हैं।

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