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यमुना प्रदूषण पर फिर आड़े आई धन की कमी

यमुना प्रदूषण के खिलाफ चल रहे प्रयास में फिर से धनराशि आड़े आने लगी है। सब चाहते हैं कि यमुना साफ हो। हर प्लान का बजट 250 से 300 करोड़ का बैठ रहा है। जबकि डीपीआर पर करीब 15 खर्च होने का अंदाजा सामने आया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह खर्चा देगा कौन। बात बजट के प्रबंध पर टिकी है।

यमुना प्रदूषण को लेकर अब तक कई तरह के प्लान सामने आ चुके हैं। हर प्लान में यमुना की सफाई होने का दावा किया गया है। पिछले एक साल से यमुना किनारे समानांतर नाले के निर्माण के जरिये यमुना को साफ करने की मांग उठ रही है। इस पर केन्द्र सरकार ने बाकायदा लिखित में समझौता भी यमुना आंदोलनकारियों से किया था। जिस पर अमल नहीं होता दिख रहा। ऐसे में स्थानीय लोगों के प्रयास से गुजरात में साबरमती की स्वच्छता पर काम कर चुके इंजीनियर अपूर्व पारीख का दौरा यमुना किनारे कराया गया है। उन्होंने यमुना एक्शन प्लान के सिस्टम को भी देखा।

गुजरात के इंजीनियर ने यमुना पर काम करने के लिए अपनी सहमति दे दी। वे अपनी कम्पनी से डीपीआर बनवाने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके लौटने के बाद नगर पालिका में मंथन की स्थिति चल रही है। हालांकि डीपीआर बनाने के काम को खुद नगर पालिका परिषद करना चाहती है। इसके बाद यमुना की स्वच्छता के लिए होने वाले काम को कराने के लिए बजट केन्द्र सरकार से मांगा जाएगा।

बजट आए कहां से
अब तक यमुना की स्वच्छता को लेकर सामने आए अनुमानित लागत पर गौर करें तो वृंदावन से मथुरा और गोकुल तक यमुना किनारे समानांतर नाले निर्माण और एसटीपी प्लांट समेत पर खर्च करीब 250 से 300 करोड़ तक आ सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि इतना बड़ा बजट आए कहां से?

वजर्न
गुजरात के इंजीयिर की प्लानिंग पर विचार विमर्श किया गया है, लेकिन डीपीआर नगर पालिका परिषद खुद ही बनवाएगी। रही बात नाले और एसटीपी निर्माण के खर्च की, उसकी केन्द्र सरकार से मांग करेंगे।
मनीषा गुप्ता, चेयरमैन नगर पालिका 

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