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कंगाल हुआ श्रीराम जन्मभूमि न्यास

श्रीराम जन्मभूमि न्यास का फण्ड खत्म हो गया है। न्यास के खजाने में फूटी कौड़ी भी नहीं बची है। धन संकट के कारण ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण की दोनों कार्यशालाओं में पत्थर तराशने का काम बन्द चल रहा है। कारीगर भी पगार न मिल पाने के चलते रोी-रोटी की जुगाड़ में अपने गाँवों को लौट गए हैं। अब तो कार्यशाला में निर्मित हो चुके पत्थरों की काई छुड़ाने के लिए भी धन का टोटा है। खुद विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल को आर्थिक संकट का यह दर्द साल रहा है। विहिप एक बार फिर हिन्दू समाज के सामने झोली फैलाने की तैयारी में है। लेकिन विहिप के सामने सबसे बड़ा संकट यही है कि मंदिर निर्माण के लिए बिना एक ईंट रखे वह अब जनता के सामने पैसा लेने किस मुँह से जाए। श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण आंदोलन के दौरान विहिप ने हिन्दू समाज से बड़ी धनराशि एकत्र की थी। इस धनराशि को श्रीराम जन्मभूमि न्यास के फण्ड में जमा कर अयोध्या में स्थापित दो कार्यशालाओं में मंदिर के लिए पत्थरों को तराशने का काम कराया जा रहा था। इस फण्ड का सवा आठ करोड़ रुपए अब खत्म हो गया है। रविवार को अयोध्या आए विश्व हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में न्यास के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि हिन्दू समाज गरीब नहीं है और अपने आराध्य के लिए इस समाज के हृदय में बहुत विशाल जगह है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो एक बार फिर हिन्दू समाज से पत्थरों को तराशने का काम पुन: शुरू कराने और तराशे जा चुके पत्थरों की काई छुड़ाने के लिए धन एकत्र किया जाएगा। वैसे यास के सामने फण्ड का इतना बड़ा संकट पहली बार खड़ा हुआ है। न्यास की दोनों कार्यशालाओं में पिछले 18 वर्षो के दौरान राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर पत्थर तराश कर रखे गए हैं।ं

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