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राम मंदिर तोड़कर नहीं बनी मस्जिद:प्रोफेसर इरफान

विश्व प्रसिद्ध इतिहासकार और एएमयू के एमरेटस प्रोफेसर इरफान हबीब ने अयोध्या विवाद में एक नई बात कही। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं कराया गया था। सन1527 में मुगल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया था। इतिहास के पन्नों में कहीं दर्ज नहीं कि उस जगह कोई मंदिर था। न ही मीर बाकी के इतिहास में उसका जिक्र है। प्रो. हबीब शनिवार को एएमयू के स्टाफ क्लब में अयोध्या के विवादित ढांचे को लेकर आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) और डेमोक्रेटिक टीचर्स एसोसिएशन के संयुक्त सेमिनार में प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि सांप्रदायिक ताकतें मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का भ्रामक प्रचार कर रही हैं। राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाकर इसे मुद्दा बनाया गया। प्रो. हबीब ने संघ परिवार पर आरोप लगाया कि वह इस मामले से भगवान श्रीराम की छवि को गलत रूप में पेश कर रहा है। इस मुद्दे से उनकी छवि को हिंसक जाहिर किया जा रहा है। जबकि, रामायण में कहीं भी श्रीराम को इस रूप में नहीं दर्शाया गया। उनकी छवि उदार और सबके लिए न्याय करने वाली रही है। तभी उनके राज को रामराज्य भी कहा जाता है। संघ परिवार जो कर रहा है, उससे उनकी बिल्कुल उलट छवि पेश हो रही है।
 प्रो. हबीब ने संदेश दिया कि अयोध्या का मसला हिन्दू-मुसलमान के बीच का आपसी झगड़ा नहीं है। बल्कि, जनता और सांप्रदायिक ताकतों के बीच का मुद्दा है। सांप्रदायिक ताकतें लोगों को बांटने की दिशा में इस मुद्दे को हवा दे रही हैं। अब जरूरत है कि जनता को सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त मोर्चे का गठन करना होगा। विवादित ढांचे के मुद्दे पर प्रो. इरफान हबीब ने यह भी कहा अब तक इस मामले में न्याय नहीं मिल पाया है।

उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक धर्म की प्रार्थना को भी असंवैधानिक करार दिया। कहा, संविधान में कहीं भी यह अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे मामलों में उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को आदर्श बताते हुए मिसाल पेश की कि वह सर्वधर्म समभाव में विश्वास रखते थे। हर सभा में वह सभी धर्मो की प्रार्थना कराया करते थे। जब एक धर्म की प्रार्थना पर आपत्ति हुई तो गांधी जी ने साफ कहा था कि एक धर्म की प्रार्थना सभा नहीं होगी तो किसी धर्म की प्रार्थना नहीं की जाएगी। राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को नसीहत दी कि वह गांधी जी की राह चलकर निष्पक्ष आंदोलन चलाएं। नैतिक साहस और समझदारी से काम लें। इस सेमिनार में डेमोक्रेटिक टीचर्स एसोसिएशन से डॉ. प्रदीप सक्सेना, एसएफआई सचिव जावेद इकबाल, संयुक्त सचिव नूर जहान, एआईएसएफ सचिव दूवा व शमीम अख्तर उपस्थित थे।

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