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मेरे बेटे को पुलिस की लापरवाही ने मार डाला

मेरे बेटे को पुलिस की लापरवाही ने मार डाला

नेहरू कॉलोनी के ब्लास्ट में अपने छोटे बेटे तुषार को खोने के बाद पिता सतीश धीमान ने उसकी मौत का जिम्मेदार पुलिस प्रशासन को ठहराया है। सिविल अस्पताल में मां, बाप और तुषार के बड़े भाई का रो-रोकर बुरा हाल था। रोते-बिलखते पिता चीख चीख कर बोलते रहे कि मेरे बेटे को पुलिस प्रशासन की लापरवाही निगल गई।

अपने लाडले तुषार को ब्लास्ट में खोने के बाद तुषार के पिता का सिविल अस्पताल में पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के दिलाशा देने पर सब्र का बांध टूट गया। तुषार के पिता सतीश धीमान को अस्पताल में ढांढस बंधाने पहुंचे पुलिस अफसरों को बेटे को खोने के बाद जमकर कोसा। बेटे को खोने बाद बुरी तरह टूटे पिता ने रोते बिलखते और जोर जोर से चीखते रहे। उन्होंने अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार पुलिस प्रशासन की लापरवाही बताया। आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने छह दिसंबर के दिन शहर में सुरक्षा के नागरिकों को सुरक्षा देने का ढिंडोरा पीट रखा था। आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की लापरवाही के कारण आज मेरा बेटा इस दुनिया में नहीं रहा है। उधर, तुषार की ब्लास्ट में मौत के बाद परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। तुषार अपने घर में सबसे छोटा था। उसकी मां किरण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। तुषार का बड़ा भाई विशाल कक्षा नौ का छात्र है। परिजनों और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
टाइम लाइन:
12: 47 मिनट पर सभा स्थल से दो सौ मीटर की दूरी पर ब्लॉस्ट।
12: 50 मिनट पर लोगों ने ब्लॉस्ट में छात्र को पड़ा देखा।
12: 55 मिनट पर एंबुलेंस छात्र को लेकर अस्पताल पहुंची।


12: 57 मिनट पर एलआईयू और पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे।
1:00 बजे एसपी देहात और एएसपी घटना स्थल पर पहुंचे।
1:05 मिनट पर भारी पुलिस बल घटना स्थल पर तैनात।
1:10 मिनट पर पुलिस ने गली को दोनों तरफ किया बंद।
1:20 मिनट पर बम निरोधक दस्ता भी घटना स्थल पर पहुंचा।
1:30 मिनट पर एसएसपी ने घटना स्थल पर पहुंचकर ली जानकारी।
2:00 बजे डीएम डी सेंथिल पांडियन ने भी घटना स्थल पर पहुंचे।
2:05 मिनट पर लोगों ने सिविल अस्पताल के सामने लगाया जाम।
2:10 मिनट पर विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचे।
2: 15 मिनट पर डीआईजी संजय गुंज्याल घटना स्थल पर पहुंचे।
2: 20 मिनट पर सिविल अस्पताल के बाहर पहुंचे डीआईजी।
2: 27 मिनट पर आईजी राम सिंह मीणा पहुंचे सिविल अस्पताल।
2: 30 मिनट पर डीआईजी और हाईवे पर बैठे लोगों की नोकझाेंक।
3: 05 मिनट पर डीआईजी ने हाईवे पर खुलवाया जाम।
3: 40 मिनट पर एसएसपी स्वीटी अग्रवाल बच्चाे के परिजनों से मिलीं।
4:00 बजे तक एसएसपी ने लोगों को किया समझाने का प्रयास।
4: 30 मिनट पर बज्र वाहन सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा।
4: 35 मिनट पर लोगों का पीएम हाउस के बाहर हंगामा।
4: 45 मिनट पर दोबारा लोगों ने हाईवे पर लगाया जाम।
5: 00 बजे तक बाहर का पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा।
5: 30 से छह बजे तक अधिकारियों की चली वार्ता।
6:00 बजे डीएम की मृतक के परिवार की मुआवजा की घोषणा।
6:05 मिनट पर मुआवजा और 15 घंटें में खुलासे का आश्वासन पर खोला जाम।
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गलत खबर चलने से मीडिया पर भी भड़के
एक इलेक्ट्रानिक चैनल पर घटना के संबंध में एक गलत खबर प्रसारित हो जाने से लोगों का गुस्सा मीडिया पर भी हो गया। इस चैनल ने छात्र के बैग में बम होने की खबर प्रसारित कर दी थी। इससे नाराज परिजनों और लोगों ने अस्पताल परिसर से मीडियाकर्मियों को खदेड़ दिया।

हमेशा पहली पंक्ति में बैठता था तुषार

तुषार पढ़ने में काफी होनहार था। समय का तो वह काफी पाबंद था। पहली पंक्ति में होशियार बच्चों के साथ ही  बैठता था। स्कूल से जाते समय क्लास टीचर ने बच्चों को पेपर की जानकारी दी और सभी से समय से आने के लिए भी कहा। लेकिन उन्हें क्या पता था कि अब तुषार कभी नहीं आ पाएगा।
राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा छह सी का छात्र तुषार सभी का प्यारा था। समय से स्कूल आना, होमवर्क पूरा रखना और सच बोलना उसकी खासियत थी। ब्लॉस्ट के बाद तुषार की क्लास टीचर पदम चौधरी ने बताया कि जब स्कूल की छुट्टी की घंटी बजाई गई तो उन्होंने सभी बच्चों से सोमवार को पेपर की जानकारी देते हुए तुषार से भी समय से आने के लिए कहा। लेकिन तुषार हमेशा-हमेशा के लिए हमसे दूर चला गया। उन्होंने बताया कि तुषार हमेशा काम पूरा कर लाता था। साथ ही वह बेहद समझधार और सच बोलने वाला था। कुछ सवाल पूछने या अन्य शैतानी कर रहे बच्चों के नाम पूछने पर वह बड़ी ही ईमानदारी से बता देता था। बताया कि तुषार को कभी काम करने के लिए बोलने की जरूरत ही नहीं पड़ी। वह कक्षा के होशियर बच्चों के साथ ही बैठता था। उसकी कक्षा में उपस्थिति भी पूरी रहती थी।

पढ़ने की ललक ही ले गई तुषार को’

‘पढ़ने की बहुत ललक थी उसमें। आज दो भाई स्कूल नहीं गए थे। लेकिन तुषार नहीं माना और स्कूल चला गया। हमें क्या पता था कि वो वहां से वापस नहीं आएगा।’ अस्पताल में तुषार को देखने पहुंचे परिजनों के साथ रो रोकर बेहाल उसकी ताई कुछ इसी तरह से दर्द बयान कर रही थी।
कृष्णा नगर गली नंबर तीन में आदेश और सतीश दोनों भाई साथ ही रहते हैं। आदेश के तीन बेटे सौरभ, गौरव और शेखर हैं जबकि सतीश के दो बेटे तुषार और विशाल हैं। राजकीय इंटर कॉलेज में तुषार, विशाल और शेखर पढ़ने जाते थे लेकिन शनिवार को शेखर और तुषार के बड़े भाई विशाल पढ़ने नहीं गए। ताई के अनुसार तुषार ने घर पर बताया कि सोमवार से पेपर हैं। इसलिए स्कूल जरूर जाऊंगा। बच्चाे की पढ़ने की ललक के आगे परिजन कुछ नहीं कह पाए और उसे घर से भेज दिया। लेकिन उन्हें क्या पता था कि तुषार फिर वापस नहीं आएगा। इसके बाद तो शनिवार दोपहर करीब एक बजे घर उसके घायल होने की सूचना ही आई। अस्पताल पहुंचे तो वहां उन्हें कोई दिखाई ही नहीं दिया। पता किया तो उसकी मौत की जानकारी मिली।

तुषार की हालत देख चश्मदीदों में खौफ

स्कूल की छुट्टी होते ही धीरे धीरे बच्चे गेट से निकलने लगे। भीड़भाड़ से बचते हुए किसी तरह छात्र केएल डीएवी को पार किया और पेट्रोप पंप वाली गली में पहुंचे। लेकिन सामने चल रहे तुषार को एक ब्लास्ट ने तिनके की तरह उड़ा दिया। पीछे चल रहे कक्षा आठ के राहुल और मोहित यह देख स्तब्ध रह गए। इसके बाद घंटे भर तक वे न कुछ कह पाए और न ही कुछ समझ पाए।

हादसा होते ही कुछ बच्चों ने वापस पीछे दौड़ लगा दी। जबकि कुछ वहीं जड़ हो गए। इनमें मोहित धारीवाल और राहुल चंचल भी थे। ये दोनों नई बस्ती में अपने घर जा रहे थे। करीब 50 मीटर की दूरी पर उनके सामने हुए इस हादसे को वे बयान ही नहीं कर पा रहे थे। कई बार पूछने पर मोहित और राहुल बस अचानक जोर के धमाके के साथ मिट्टी व धूल उड़ने और तुषार के ब्लास्ट की धमक से दूसरी तरफ गिरने की बात कह रहे थे। इसपर सुरक्षा एजेंसियों ने भी इन दोनों छात्रों से पूछताछ करनी चाही, लेकिन वे कुछ बताने की स्थिति में नहीं थे। घबराहट से थरथर कांप रहे दोनों ही छात्र शून्य में देख रहे थे और न तो रो पा रहे थे और न ही कुछ कह पा रहे थे। उधर, राहुल के पिता संजय ने बताया कि हादसे के बाद बच्चों से उनकी बात ही नहीं हो पाई है। पुलिस उन्हें जानकारी लेने के लिए अपने साथ गंगनहर थाने ले आई। लेकिन वहां भी बच्चों से मिलने नहीं दिया जा रहा है।


ब्लास्ट से सहमे लोग

मकानों की खिड़की के चटके शीशे
ब्लॉस्ट के समय धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के मकान हिल गए। लोग भागकर अपनी छतों पर आ पहुंचे। उधर, गली में बने राजकुमार मित्तल के मकान की खिड़की के शीशे तक चटक गए। राजकुमार मित्तल के अनुसार जिस समय ब्लॉस्ट हुआ, वे अपने घर पर खाना खा रहे थे। खाना छोड़कर घर से बाहर आकर नजारा देखा तो उनके होश उड़ गए।

घटना स्थल पर बनाया सुरक्षा घेरा
ब्लॉस्ट होने के बाद घटना स्थल पर पुलिस ने गली का रास्ता दोनों तरफ से बंद कर दिया। साथ ही घटना स्थल के आसपास कोई न आए। इसके लिए पुलिस ने रस्सी के सहारे चारों तरफ सुरक्षा जाल बना दिया था। किसी को भी घटना स्थल के आसपास आने की इजाजत नहीं थी।

घटना से मात्र सौ मीटर की दूरी पर था पेट्रोल पंप
जिस जगह ब्लॉस्ट हुआ, उससे लगभग सौ मीटर की दूरी पर ही पेट्रोल पंप है। गनीमत रही कि ब्लॉस्ट पेट्रोल पंप से काफी दूर हुआ। वरना एक बड़ा हादसा हो सकता था। ब्लॉस्ट के बाद पेट्रोल पंप पर कर्मचारियों में भी भगदड़ मच गई।

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