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आतंकी हिंसाओं में कश्मीर में इस साल 181 की मौत

आतंकी हिंसाओं में कश्मीर में इस साल 181 की मौत

जम्मू-कश्मीर में पांच दिसंबर को हुए चार आतंकी हमलों में 21 लोगों की मौत के बाद से चालू साल में राज्य में आतंकी हिंसा में मरने वालों की संख्या 181 पर पहुंच गई। देखा जाए तो 2013 में भी इतने लोगों की ही मौत हुई थी। इस तादाद में नागरिक, आतंकी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।

अभी दिसंबर खत्म होने में 25 दिन हैं और राज्य में विधानसभा चुनाव के कारण और आतंकी हिंसा की चेतावनी दी जा चुकी है। ऐसे में लगता है कि आतंकी हिंसा में मृतकों की तादाद 2011 के 183 को पार कर सकती है। वर्ष 2012 में 112 लोगों की मौत हुई थी।

इसी तरह इस साल राज्य में सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन पिछले साल के मुकाबले 57 प्रतिशत बढम् गया। हालांकि घुसपैठ की आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। अक्तूबर महीने में सुरक्षा बलों ने बताया था कि 50 आतंकी घुस चुके थे और 200-250 घुसने की फिराक में हैं।

1-आतंकी हिंसा में कितने मरे
कुल मौतें    
वर्ष 2014                
(पांच दिसंबर तक)
181 मौत           
29 नागरिक, 103 आतंकी मरे
49 जवान शहीद हुए

वर्ष 2013
181 मौत
20 नागरिक, 100 आतंकी मरे
61 जवान शहीद

वर्ष 2012
117 मौत
16 नागरिक, 84 आतंकी ढेर
17 जवान शहीद

वर्ष 2011
183 मौत
34 नागरिक, 119 आतंकी  मरे
30 जवान शहीद

वर्ष 2010
375 मौत
36 नागरिक, 270 आतंकी मरे
69 जवान शहीद हुए

वर्ष 2009
375 मौत
55 नागरिक, 242 आतंकी ढेर
78    सैनिक शहीद

2-संघर्ष विराम का उल्लंघन
*2014 में संघर्ष विराम उल्लंघन 57 प्रतिशत बढ़ा
-केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2014 में 25 नवंबर तक जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का 545 बार उल्लंघन हुआ।
-2013 में संघर्ष विराम उल्लंघन के 347 मामले दर्ज हुए थे।
-यानी पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल इन मामलों में 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

*सेना/बीएसएफ और एलओसी/आईबी
-बीएसएफ की देखरेख वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 395 बार संघर्ष विराम टूटा।
-सेना की तैनाती वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर उल्लंघन में 27.5 फीसदी वृद्धि हुई।
-बीएसएफ तैनाती वाली सीमा पर 2013 में 148 ऐसे मामले हुए थे। यानी यह वृद्धि 167 प्रतिशत से ज्यादा रही।
-सेना की तैनाती वाले आईबी/एलओसी में स्थिति उलट गई। 2013 में 199 मामले दर्ज हुए थे पर इस साल 150 संख्या रही।

*कितने हुए शहीद
-25 नवंबर तक संघर्ष विराम उल्लंघन में पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हुए। जबकि 2013 में 12 हुए थे।
-पिछले साल किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई थी, इस साल 13 की जान गई।

3-पिछले सालों में घुसपैठ लगातार बढ़ी
-2014 में घुसपैठ के सरकार ने आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं। पर सुरक्षा बलों के प्रमुखों ने समय-समय पर जो बयान दिए उससे जाहिर होता है कि 2013 के मुकाबले 2014 में घुसपैठ कम हुई है।
-जुलाई से अक्तूबर के बीच 50 आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुस आए। इनमें ज्यादातर उत्तरी कश्मीर से घुसे। वैसे घाटी में बर्फवारी से पहले ही घुसपैठ की कोशिशें ज्यादा होती हैं।
-इस साल सीमा पार करते हुए 24 आतंकी ढेर कर दिए गए।
-अक्तूबर में सुरक्षा बलों ने बताया था कि दक्षिण कश्मीर और पीर पंजाल की पहाड़ियों से 200-250 आतंकी घुसपैठ की फिराक में थे।
-अगर पिछले सालों की बात की जाए तो सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2011 में 317 घुसपैठिये आए। इनमें 86 गिरफ्तार किए गए जबकि 50 को सुरक्षा बलों ने मार गिराया।
-2012 में 332 घुसपैठिये आए। 123 पकड़े गए जबकि 30 मारे गए। 2013 में 345 आतंकी घुस आए। इनमें से 145 पकड़े लिए गए। पिछले साल 51 आतंकी मारे गए थे।

मोदी सरकार आने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया
-लोकसभा में पेश आंकडमें के मुताबिक मई में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से आईबी/एलओसी पर संघर्ष विराम तोड़ने मामले काफी बढ़ गए। 31 अक्तूबर 2014 तक ऐसे 152 मामले दर्ज किए गए। इसमें 31 नागरिकों की मौत हुई और 101 जख्मी हो गए। सुरक्षा बलों के दो कर्मी शहीद और 14 जख्मी हुए।

नवाज की ताजपोशी के बाद से आतंकी हिंसा में 317 की मौत
पाकिस्तान में नवाज शरीफ जून 2013 में प्रधानमंत्री बने। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा बढ़ने लगी। अगर नवाज की ताजपोशी के बाद पांच जून 2013 से पांच दिसंबर 2014 यानी डेढ़ साल की बात करें तो जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा में मरे 317 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 188 आतंकी 91 सुरक्षाकर्मी और 38 नागरिक हैं। l

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