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राज्य सरकार यदि संजीदा होती तो यादव सिंह जैसे अधिकारी ना होते

राज्य सरकार यदि संजीदा होती तो यादव सिंह जैसे अधिकारी ना होते

अगर राज्य सरकारों ने भ्रष्टाचार थामने के लिए संजीदगी से काम किया होता तो शायद नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथारिटी में यादव सिंह जैसे काली कमाई के धुरंधर पैदा ही न हुए होते।

जी हां, भ्रष्टाचार थामने की कवायद वर्ष 1965 में प्रदेश में सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम बना कर शुरू तो की गई लेकिन कभी सियासी फरमानों, तो कभी वरदहस्त जैसी रुकावटों ने इसे न केवल थाम दिया बल्कि बचने का अड्डा बना दिया है। अब बवाल बढ़ने पर आईएएस अखिलेश सिंह को नोएडा अथारिटी में विजिलेंस अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकारी महकमों में राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 1965 में ‘उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम-1965’ बनाया। इसके तहत सतर्कता महकमे की स्थापना की गई। मकसद था, भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए सरकारी महकमों पर यह  नज़र रखेगा। सरकार ने वक्त के साथ कृषि विभाग, सहकारिता, बिजली विभाग और खाद्यान्न विभाग में सतर्कता प्रकोष्ठों की स्थापना की।

प्रकोष्ठों में एक एसपी तैनात किए गए। मकसद महकमे के करोड़ों के बजट के इस्तेमाल में भ्रष्टाचार को रोकना था लेकिन सभी प्रकोष्ठ नाकाम रहे। अब तक के इतिहास में इन चारों प्रकोष्ठों में से सहकारिता प्रकोष्ठ ने ही लैकफेड घोटाले में राज्य के तीन मंत्रियों रंगनाथ मिश्र, चंद्रदेव राम यादव और बादशाह सिंह को जेल भेजा है। इसके अलावा बाकी प्रकोष्ठ ‘ठंडा बस्ता’ बन गए हैं। प्रकोष्ठों में तैनाती को अब सजा माना जाता है।

कई अदालतों द्वारा हर सरकारी महकमे में विजिलेंस अधिकारी तैनात करने के आदेशों के बावजूद नोएडा अथवा ग्रेटर नोएडा में भी विजिलेंस अधिकारी तैनात नहीं किए गए। नतीजा चाहे गोरखपुर विकास प्राधिकरण हो या फिर वाराणसी या इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, कहीं ‘छोटे यादव सिंह’ तो कहीं ‘बड़े यादव सिंह’ पैदा होते गए। अब नतीजा है कि प्राधिकरणों में यादव सिंह जैसे इंजीनियरों को भरमार है। विजिलेंस अधिकारी न होने या यूं कहें सियासी मंशा की कमी से कई ‘यादव सिंह’ की फौज खड़ी होती जा रही है।

यादव सिंह की संपत्ति से राज्यपाल भी हैरान
प्रमुख संवाददाता राज्य मुख्यालय। यादव सिंह की अकूत संपत्ति देख राज्यपाल राम नाईक भी हैरान हैं। शुक्रवार को इंदिरागांधी प्रतिष्ठान में आयोजित एलएमए के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल राज्यपाल ने मंच से यादव सिंह का नाम नहीं लिया लेकिन बाद में जब पत्रकारों ने उनसे यादव सिंह के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मैं खुद हैरान हूं। आखिर यादव सिंह ने इतनी संपत्ति कैसे बटोर ली?


यादव सिंह की पत्नी के लॉकर खोले गए
अरबपति चीफ इंजीनियर यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता व उनके साझीदारों से जुड़े 13 बैंक लॉकरों में से कुछ बैंक लॉकर शुक्रवार को खोले गए। यह लॉकर विगत 28 नवम्बर को हुई छापेमारी में सील किये गए थे। आयकर जांच से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। सूत्रों का दावा है कि लाकरों में जमीन में निवेश के दस्तावेज और कुछ गहने आदि मिले हैं।

यह लॉकर किस बैंक में कहां थे और इनके खोले जाने के बाद क्या-क्या मिला ? फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। आयकर जांच से जुड़े अधिकारी यह जरूर कह रहे हैं कि इन सील बैंक लॉकरों को ‘वैल्यूअर’ की मौजूदगी में उस वक्त खोला जा रहा है जब बैंक का अपना नियमित कामकाज निपटा लिया जाता है ताकि ग्राहकों को कोई असुविधा न हो। यादव सिंह की पत्नी व उनके साङीदारों के बैंक लॉकरों को खोलने के बाद देर शाम तक उनकी पड़ताल और बरामद चीजों का लेखा-जोखा बनाने का काम चलता रहा।

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  • Web Title:सरकारी लापरवाही से बढ़ते हैं यादव सिंह जैसे अधिकारी