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21 साल बाद संदूक में मिला शहीद का शौर्यचक्र

जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स (ग्रिफ) में तैनात पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट बुंगली निवासी शहीद ठाकुर राम के शौर्य चक्र की चमक 21 साल बाद सामने आयी। शौर्य चक्र के महत्व से अनजान परिवार ने इसे संदूक में बंद करके रखा था। अब सैनिक कल्याण बोर्ड की पहल के बाद  शहीद का शौर्य चक्र न केवल सरकारी दस्तावेजों में चढ़ा दिया गया है बल्कि परिवार को मिलने वाली सहायता भी मंजूर कर दी गई है।


ठाकुर राम 13 जुलाई 1992 को सिक्किम में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गये थे। 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा ने दिल्ली में शहीद की पत्नी द्रौपदी को शौर्य चक्र देकर सम्मानित किया। लेकिन, शौर्य चक्र की अहमियत से अनजान द्रौपदी ने पदक को संदूक में रख दिया। सालों बीतने के बाद भी शहीद ठाकुर राम का शौर्य पदक राज्य सरकार के रिकार्ड में दर्ज नहीं हो सका है। इस कारण शौर्य चक्र पाने वाले शहीद के परिजनों को सरकार से मिलने वाली सहायता भी नहीं मिल पायी।

ऐसे खुला पूरा मामला
तीन महीने पहले शहीद ठाकुर राम की बेटियां दीपा और अंजू सार्टिफिकेट अटेस्ट कराने जिला सैनिक कल्याण बोर्ड कार्यालय पहुंची। इस दौरान जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला से बातचीत में पिता की शहादत के बारे में बताया। रौतेला ने उन्हें शौर्य चक्र की अहमियत बताते हुए सरकार से मिलने वाली सुविधाओं की फाइल चलायी। रौतेला का कहना है कि डीएम कार्यालय में 4.50 लाख रुपए की सहायता राशि भी पहुंच चुकी है। परिवार को अब हर साल एक लाख रुपए मिलेंगे। शहीद ठाकुर का नाम नैनीताल जिले में शौर्य चक्र पाने वाले आठवें शहीद के रूप में शामिल कर लिया गया है। शहीद की पत्नी दो बेटियों दीपा व अंजू के साथ हल्द्वानी स्थित हरिपुर ग्राम कुसुमखेड़ा में रहती हैं।

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