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मऊ दुर्घटना: स्कूल वैन चालक पर केस दर्ज

रानीपुर थाना अंतर्गत महासो रेलवे क्रासिंग पर गुरुवार की सुबह छह बच्चों के मौत और घायल बच्चों का जिम्मेदार स्कूली वैन चालक सर्वेंद्र को ठहराया गया है। लोगों के रोकने के बाद भी जान बूझकर वाहन को टक्कर कराये जाने पर थाने में एसओ ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। इससे अब चालक की और मुश्किलें बढ गई है। उधर परिवहन विभाग की जांच में चालक का ड्राइविंग लाइसेंस प्राइवेट वाहन का पाया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुये विभाग अब लाइसेंस को निरस्त करने की नोटिस जारी करेगा।

महासो रेलवे क्रासिंग पर जांच में पुलिस को पूरी तरह से चालक की लापरवाही मिली है। लोगों के रोकने के बावजूद भी चालक वाहन को लेकर भागा। और जानबूझकर ट्रेन से टक्कराया। पुलिस ने इसी मामले को लेकर कार्रवाई है। रानीपुर थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर केके पांडेय ने बताया कि उन्होंने खुद घटना की केस दर्ज कराई है। उधर एआरटीओ श्याम लाल ने बताया कि जांच के बाद पाया गया कि चालक र्सवेद्र का प्राईवेट वाहन चलाने का लाइसेंस था। अब विभाग की ओर से चालक को नोटिस जारी की जायेगी। इसके बाद उसका लाइसेंस भी निरस्त कर दिया जायेगा। चालक पर एक- एक करके शिकंजा कसता जा रहा है।


आंगन में बच्चों की गूंजने वाली किलकारी की जगह मातम छा गया है। महिलाओं की रुद्रन- क्रदंन से लोगों का कलेजा फट जा रहा है। घर के पुरूष बाहर जाकर अपने आंसू पोछ रहे है। बच्चों के कपड़े देखकर उनकी मां बेहोश हो जा रही थीं। पूरा मातमी माहौल के बीच सन्नाटा छाया था। घटना से कोई भी उबर नहीं पा रहा है। सांत्वना देने वाले भी बच्चों को याद करके रो पड़ते।

मामा-मामा की आवाज को तरस रहा ओम प्रकाश
ओमप्रकाश और परशुराम यादव अपनी बहन सुनीता को जान से ज्यादा मानते थे। इनके बहनोई कमलेश मुंबई में रहते है। ऐसे में भाइयों ने अपनी बहन और तीन भांजे कृष्णा, सुंदरम और शिवम को पास रखकर उनके देखरेख के साथ अच्छी शिक्षा देने का कार्य कर रहे थे। भांजे हमेशा अपने मामा के पास ही रहता करते थे। बच्चे हमेशा अपने मामा से प्यार करते थे। कृष्णा और सुंदरम की मौत ने उन्हे झकझेर दिया है। बच्चों की आवाज के को याद कर वे सिहर जा रहे थे। उनके आंखों से आंसू नहीं रूक रहे। शिवम अभी भी जीवन और मौत से जुझ रहा है। परिजन पूरी तरह से बेसुध हो गये हैं।



आयुष. आयुष पुकार कर बेहोश हो जा रही मां रंभा
 मां- बाप का इकलौता चिराग आयुष की मौत ने लोगों को झकझाेर कर रख दिया है। घर पर केवल मां रंभा की रोने की आवाज सुनाई देती। जब भी उसे कोई सांत्वना देने के लिये आता वह अपने बेटे आयुष को लाने के लिये पुकारती। यह सुनकर लोगों की आंखों में आंसू आ जाते। रेलवे से रिटायर आयुष के बाबा भी एक चारपाई पर पड़े हैं। अपने नाती को याद करके रो पड़ते। घर पर मातमी माहौल हो गया है। पास- पड़ोस के भी लोग घटना को याद करके दहल जा रहे हैं।

बेटे साहिल को गोंद में लेकर बेहोश हो जा रही सुनीता
 मां.मां की हमेशा रट करने वाली शिवांगी का चेहरा जैसे ही उसकी मां सुनीता के सामने आता वह अपने बेटे साहिल को गोंद में लेकर सिहर उठती। बेटी शिवांगी की तुतलाती बोली और दुलार को कहते- कहते बेहोश हो जाती। गांव की महिलायें व सुनीता की बहन उसे बाहों में पकड़ भी रो पड़ रही थीं। पूरा महौल ही गमगीन हो गया था। लोग सहिल का मुंह देखने की बात कर कर सात्वना देते थे।


साहिल की मौत से मर्माहत थे ग्रामीण
 गुरुवार की रात बीएचयू में साहिल की मौत की जैसे ही जानकारी हुई। ग्रामीण उनके घर आ गये थे। सभी परिजन साथ में ही वाराणसी गये थे। ताला लगा था। लेकिन ग्रामीण परिजनों के आने की बांट जो रहे थे। साहिल की दिनचर्या को याद करके वे रोने लगते थे।


कृष्णा को बेटे की आस से पाल रहे थे जवाहिर
जवाहिर की छह बेटियां ही थीं। बेटी लीलावती के बेटे कृष्णा को हमेशा लाड- प्यार से रखते थे। नाना. नाना कहकर कृष्णा उनके पास ही रहता था। जब तक वह आंखों से ओझल रहता वह बेचैन रहते थे। जवाहिर कान्वेट स्कूल में नहीं पढ़ने को कहकर रो पड़ते थे। इकलौता पौत्र के मौत ने परिजनों को झकझेर कर रखा दिया है। अगर कोई भी बच्चा घर आ जा रहा है तो लीलावती और उसके पिता जवाहिर और पति मैनेजर बच्चाे को भुल नहीं पा रहे हैं। किसी के भी आने पर वह कृष्णा को भेजने की बात कह रहे थे।



स्कूल वाहन चालक का नहीं था लाइसेंस
 महासो में दुर्घटनाग्रस्त स्कूल वाहन के चालक सरविंद का लाइट मोटर वेहिकल चलाने का लाइसेंस संख्या यूपी 5420140005421 तो बना था लेकिन पब्लिक वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं था। एआरटीओ श्यामलाल ने बताया कि उसका एलएमवी/मोटर साइकिल चलाने का लाइसेंस इसी वर्ष जारी किया गया था।

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