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गांव से एक साथ तीन शव निकलने से मचा कोहराम

महसों गांव के लोगों ने अपने तीनों लाल को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। तीन बच्चों की अंत्येष्टि गुरुवार की रात तक तमसा के तट पर कर दिया गया। इसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल रहे। बच्चों की अंत्येष्टि को देखकर मौके पर लोग रो पड़े। जैसे लग रहा था कि गांव से तीन हीरा निकल गये।

पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही तीनों बच्चों का शव गांव में पहुंचा कि चहुंओर चिख, पुकार से लोगों के दिल दहल गये। महिलाओं और परिजनों के साथ- साथ ग्रामीणों का भी रोते- रोते बुरा हाल था। जैसे ही बच्चों की अत्येष्टि के लिये परिजन लेकर चले। महिलायें दहाड़े मारकर बेहोश हो जा रही थीं। महिलाओं को ढांढस बंधाते हुये आयुष, कृष्णा और शिवांगी के शव को लेकर चले। तमसा तट पर जैसे ही बच्चाों का शव रखा गया। कोई भी अपने आंखों में आंसू नहीं रोक पाया। जैसे परिजनों और ग्रामीणों का कलेजा पट गया। बुजुर्ग बार- बार यही कर रहे थे कि उनकी भी उम्र यदि बच्चाों को लग गई होती से यह दिन उन्हें देखने के लिये नहीं मिलता।


साहिनसेटल का शव देर शाम को पहुंचा
 बीएचयू में उपचार के दौरान गुरुवार की साहिल पुत्र विनोद की मौत हो गई। जिसे लेकर शुक्रवार को परिजन देर शाम घर आये। जैसे ही शव घर आया। एक बार फिर गांव में कोहरा मच गया। मां कंचन देवी रोते- रोते बेहोश हो जा रही थीं।
 

. और अत्येष्टि में नहीं पहुंचा कोई बड़ा नेता
महासो में बच्चाे की मौत के बाद कोई भी जनप्रनिधि नहीं पहुंचा। अंत्येष्टि में केवल परिजन और ग्रामीण ही आये। जबकि घटना ने लोगों को झकझाेर कर रख दिया है। कुछ स्थानीय प्रतिनिधि ही पीड़ित परिजनों को ढांढस बंधाने आये। इसमें बसपा के पूर्व विधायक राजेंद्र प्रसाद, सपा की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अंशा यादव, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष व कांग्रेस नेत्री राना खातून थीं। इसके अलावा क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि भी पहुंचे। 

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