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सरहद पर समस्या

अफगानिस्तान और पाकिस्तान में दहशतगर्दी की हालत पर गौर करने के दौरान हर जानकार,  चाहे वह अपने इलाके के हों या फिर विदेशी,  इन दो मुल्कों के बीच की ‘सुराखदार सीमा’  के बारे में जरूर चर्चा करते हैं। डुरंड लाइन के लिए इसी ‘सुराखदार सीमा’  का इस्तेमाल होने लगा है और अफगानिस्तान,  पाकिस्तान तथा अमेरिका की एक के बाद दूसरी हर सरकार ने आतंक के बढ़ते साये के लिए इसी खामी को सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा, इन तीनों के बीच इस समस्या को सुलझाने और कोई फैसला न लेने के इल्जाम की वजह से अविश्वास की खाई चौड़ी होती गई है। इसमें कोई शक नहीं कि इस ‘सुराखदार सीमा’  को मजबूत बनाने की तरफ बढ़े हर कदम की अफगानिस्तान की तरफ से आलोचना होती है,  बावजूद इसके कि वह इस समस्या और समाधान से वाकिफ है।

हाल ही में अफगानियों ने इस बात की पुरजोर आलोचना की है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में 460  किलोमीटर लंबा खाई खोदा है। 10 फुट चौड़ी और आठ फुट गहरी यह खाई सरहद पर बेरोक-टोक आवाजाही में रुकावट का काम करेगी। अगर कोई माने,  तो इस खाई के पक्ष में तर्क बड़े गहरे और ऐतिहासिक हैं। सबसे पहले तो डुरंड लाइन पश्तून और बलूच कबाइली इलाकों से गुजरती है। नतीजतन,  परिवार या कई जगह पूरा गांव ही सरहद के बीच बंट जाते हैं। कायदे से कभी इस दुर्गम पहाड़ी इलाके की पहचान नहीं हुई और कबाइली लोग सरहद की परवाह किए बगैर इस या उस पार चले जाते हैं। पश्तूनों से भरी अफगान हुकूमत इसे सरहद पर बसे कबाइली लोगों के हक से नाइंसाफी बता रही है। उसका आरोप है कि यह कवायद परिवारों को बांट देगी और ऐसे में कई लोग लाचार,  बेबस रह जाएंगे,  क्योंकि उनकी जमीन,  आमदनी का जरिया,  सब कुछ दूसरे हिस्से में चला जाएगा। हालांकि,  यह वाजिब फिक्र है,  पर यह गौरतलब है कि इसी सीमा पार पारिवारिक रिश्तों की आड़ में दहशतगर्दी को बढ़ावा मिलता है। इस वजह से बीस लाख डॉलर से ज्यादा का गैर-कानूनी कारोबार चालू है,  जो नशीले पदार्थों व उपभोक्ता सामान की तस्करी के रूप में है।
द नेशन,  पाकिस्तान

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