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लाइन में लगे बिना नहीं मिलेगा पानी

रहते हैं राजधानी में पर सुबह होते ही करते हैं पानी के लिए मारामारी। इसमें बच्चे, वृद्ध, महिलाएं व पुरुष शामिल हैं। पहले पानी लेने के नाम पर आपस में बकझक होती है। कभी-कभी यह बकझक बड़ा रूप भी लेती है। सिर्फ पानी ही नहीं अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।ड्ढr ड्ढr यह नजारा है वीआईपी इलाकों से घिर अदालतगंज का। इस स्लम मुहल्ले में पांच हाार की आबादी रहती है। यहां के गरीब पेयजल के लिए चापाकलों पर ही अश्रित हैं। वह भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। अगर महिलाओं को सुबह में चापाकल पर लाइन लगाने में देरी हो गई तो बच्चों के स्कूल तो छूटते ही हैं घर वाले की डांट भी खानी पड़ती है। महिलाओं को खुले में ही स्नान करना पड़ता है। गर्मी के दिनों में हालत और खराब हो जाती है। नींद खुलते ही दर्जनों की संख्या में लोग चापकलों की ओर दौड़ पड़ते हैं। हालांकि इस मुहल्ले में रहने वाले गरीब अब इस स्थिति में जीने के लिए अपने आप को तैयार कर चुके हैं। उन्हें किसी से कोई शिकायत नहीं है। चापाकल खराब होने पर लोग आपस में चंदाकर मरम्मत कराते हैं।ड्ढr ड्ढr जानकारों के अनुसार केंद्र सरकार के नियम के मुताबिक निगम क्षेत्र में रहने वाले को प्रतिदिन प्रति व्यक्ित 135 लीटर पेयजल की आपूर्ति संबंधित विभाग को करनी है लेकिन निगम क्षेत्र में रहने के बावजूद अलामागंज में बूंद भर पानी की भी आपूर्ति नहीं की जाती है।

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