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साध्वी मुद्दा: विपक्ष की निंदा प्रस्ताव पारित कराने की मांग

साध्वी मुद्दा: विपक्ष की निंदा प्रस्ताव पारित कराने की मांग

साध्वी मुद्दे पर राज्यसभा में जारी गतिरोध समाप्त करने के लिए नौ विपक्षी दलों ने सरकार से उनके उस संयुक्त प्रस्ताव को स्वीकार करने का अनुरोध किया, जिसमें कहा गया है कि मंत्री के ऐसे बयान के स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसकी निंदा की जाए। राज्यसभा में नौ विपक्षी दलों कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, जदयू, बहुजन समाज पार्टी, माकपा, द्रमुक, भाकपा और राकांपा ने प्रस्ताव रखा।

नौ विपक्षी दलों की ओर से जारी संयुक्त बयान के अनुसार, हम सभी दल एक मंत्री के घणित बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हैं। ऐसे बयान देने वाले मंत्री को मंत्रिपरिषद से हटाने का मामला बनता है क्योंकि यह भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए के तहत संज्ञेय आपराध है और संविधान की बुनियादी प्रकृति का भी उल्लंघन करता है। हमारा यह कर्तव्य बनता है कि मंत्री को इस्तीफा देने के लिए कहा जाए या प्रधानमंत्री उन्हें मंत्रिपरिषद से हटाये जाने की सिफारिश करें।

बयान के अनुसार, जब प्रधानमंत्री ने कल राज्यसभा में बयान दिया तब हमने शांति से उनकी पूरी बात सुनी। दुर्भाग्य से प्रधानमंत्री उन्हें (मंत्री) हटाये जाने या उनकी टिप्पणी की निंदा करने के बुनियादी विषय पर नहीं बोले। विपक्षी दलों ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में हमने गुरूवार को कार्यमंत्रणा समिति को यह सूचित करने का निर्णय किया है कि सदन में निंदा संबंधी प्रस्ताव लाया जाए कि मंत्रियों का इस तरह का बयान स्वीकार्य नहीं है और इसकी निंदा की जानी चाहिए। हमने मंत्री का नाम नहीं लेने की बात भी कही। बयान के अनुसार, दुर्भाग्य से सरकार ने हमारे व्यवहारिक प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। हालांकि हमने इस अवधि में संयम बरता।

विपक्ष ने सरकार को घेरा
केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के विवादास्पद बयान पर एकजुट विपक्ष ने आज लगातार चौथे दिन लोकसभा में सरकार को घेरा और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री के बयान से संतुष्ट नहीं हुए तथा संबंधित मंत्री पर कार्रवाई की मांग करते हुए सदन से वाकआउट किया। आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्षी सदस्य अपने मुंह पर काली पट्टी लगाकर आए थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साध्वी के बयान को खारिज करते हुए मर्यादा में रहकर बोलने की नसीहत दी। उन्होंने सदन चलने देने के लिए निचले सदन के सदस्यों का आभार जताया। प्रधानमंत्री ने साध्वी मुद्दे पर विराम लगाकर देशहित में सदन में कामकाज चलने देने का आग्रह किया। इस पर सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने कहा कि प्रधानमंत्री को मालूम है कि यह विषय किस संदर्भ में उठाया गया है। यह बात उनके संज्ञान में लाना जरूरी थी। हम किसी व्यक्ति के विरूद्ध नहीं है, चाहे वह किसी भी पष्ठभूमि का हो। उन्होंने कहा कि आपके मंत्रिगण ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे देश में दूसरे तरह का माहौल बन रहा है।

अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि आपने मांग की थी और प्रधानमंत्री ने बयान दे दिया। अब सदन की कार्यवाही चलने दें। इसके बाद अपने मुंह पर काली पट्टी लगाये कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, वामदल समेत कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया। विपक्षी सदस्यों के वाकआउट के बाद अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही चलायी। इस दौरान प्रश्नों को लिया गया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत अन्य मंत्रियों ने सदस्यों के सवालों के जवाब भी दिये।  कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत कांग्रेस सदस्यों ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना भी दिया था।

मोदी ने साध्वी का बयान खारिज किया
साध्वी निरंजन ज्योति मामले पर लोकसभा की उपेक्षा करने के विपक्ष के आरोपों के बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निचले सदन में केंद्रीय मंत्री के बयान को सिरे से खारिज करते हुए इस प्रकार की भाषा से बचने और मर्यादा में रहकर बोलने की नसीहत दी। साथ ही उन्होंने इस सदन को चलने देने के लिए विपक्ष का आभार भी जताया।

सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों से मंत्री को क्षमा करने और देश हित में सदन के कार्य को आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। सदन में आज कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दल समेत कई अन्य विपक्षी दलों के सदस्य मुंह पर काली पटटी बांध कर आए थे। विपक्षी सदस्य हालांकि प्रधानमंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने सदन से वाकआउट किया।

मोदी ने कहा कि जिस बयान को लेकर विवाद चल रहा है, जब इस बयान के विषय में मुझे जानकारी मिली, उसी दिन सुबह मेरी पार्टी की बैठक थी, संसद सदस्यों की बैठक थी। उसमें मैंने बहुत कठोरता से इस प्रकार की भाषा को नामंजूर किया और मैंने यह भी कहा कि हम सबको इन चीजों से बचना चाहिए। ऐसे शब्दों को कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राज्यसभा में तीन दिन से कामकाज नहीं हो पा रहा है लेकिन वह इस सदन के सदस्यों के आभारी हैं कि इस विषय की संवेदनशीलता के बाद भी उन्होंने सदन चलने दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी को मर्यादा में रहकर सदन के अंदर और बाहर बोलना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, यह विषय सदन में उठने से पहले मैंने हमारे सभी सांसदों के सामने रखा था। उसी के तहत मंत्री जी, जो कि नयी हैं, सदन में पहली बार आई हैं, उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि से हम सभी परिचित हैं, उन्होंने क्षमा मांगी। मोदी ने इस मामले को समाप्त करने का विपक्ष से अनुरोध करते हुए कहा, और मैं मानता हूं कि (मंत्री के) क्षमा मांगने के बाद, इस सदन में इतने वरिष्ठ लोग बैठे हैं, इतने अनुभवी लोग बैठे हैं कि क्षमा के प्रति उनका क्या भाव है, हम भली भांति परिचित हैं। मोदी ने कहा, मैं सदन से आग्रह करूंगा, मैं प्रार्थना करूंगा कि जब मंत्रीजी ने क्षमा मांगी है। मैं सदन से आग्रह करूंगा कि हम देश हित में अपने कार्य को और आगे बढ़ायें।

गौरतलब है कि मंत्री के विवादास्पद बयान पर उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने और प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर बयान देने की मांग को लेकर विपक्ष ने पिछले चार दिन से लोकसभा में सरकार को निशाने पर ले रखा है। निचले सदन में कल विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया था। आज भी प्रधानमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान सदन से वाकआउट किया। गौरतलब है कि साध्वी निरंजन ज्योति ने मंगलवार को लोकसभा एवं राज्यसभा दोनों सदनों में अपने शब्दों पर खेद जताया था। उन्होंने उच्च सदन में यह भी कहा था कि यदि सदन को लगता है तो वह माफी मांगने को भी तैयार हैं।

वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति की विवादास्पद टिप्पणियों के लिए उन्हें बर्खास्त करने की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों का हंगामा आज राज्यसभा में लगातार चौथे दिन भी जारी रहा, जिसके कारण सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद बैठक स्थगित कर दी गई। सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने राज्यसभा की सदस्यता की शपथ ली। इसके बाद उप सभापति पी जे कुरियन ने जैसे ही शून्यकाल शुरू करने का ऐलान किया, विपक्षी सदस्यों ने केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए बर्खास्त करने की मांग शुरू कर दी।

कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कल सदन में प्रधानमंत्री की बात सदस्यों ने ध्यान से सुनी थी और केंद्रीय मंत्री को बर्खास्त करने का आग्रह किया था। शर्मा ने कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले अगर उसका उल्लंघन करते हैं तो यह अत्यंत चिंताजनक बात है। उन्होंने कहा कि सरकार सदस्यों की मांग मान ले तो सदन में जारी गतिरोध दूर हो जाएगा।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि यह गतिरोध नहीं, बल्कि कांग्रेस की हार से उपजी हताशा, उसका अहंकार और अराजकता है। उन्होंने कहा कि मंत्री ने अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांग ली है और इसके बाद मुद्दा यहीं खत्म हो जाता है। इस बीच कांग्रेस, जदयू और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य आसन के समक्ष आ गए और केंद्रीय मंत्री को बर्खास्त करने की मांग को लेकर नारे लगाने लगे।

तृणमूल का साथ नहीं देगी माकपा: बुद्धदेव
केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के विवादित बयान के कारण उनके इस्तीफे की मांग के बीच माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य बुद्धदेव भट्टाचार्य ने आज कहा कि उनकी पार्टी इस मुददे पर किसी भी संयुक्त कार्यक्रम में तणमूल कांग्रेस का साथ नहीं देगी। उन्होंने कहा कि मंत्री के विवादित बयान के लिए कार्रवाई जरूर होनी चाहिए। विपक्ष की मांग बिल्कुल सही है। हमारी पार्टी भी बराबर मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री रहे भट्टाचार्य ने आज जारी अपने बयान में कहा, लेकिन, हम तृणमूल के साथ किसी भी संयुक्त कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होंगे। सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई में तणमूल की कोई विश्वसनीयता नहीं है। तापस पॉल के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। ज्योति ने दिल्ली में दो दिसंबर को एक चुनावी रैली के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग किया था, जिसके बाद विवाद पैदा हो गया था।

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