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'बिल पारित कराना है सरकार के लिए चुनौती'

'बिल पारित कराना है सरकार के लिए चुनौती'

विपक्ष का रुख देखते हुए सरकार के लिए अपना विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। खासतौर पर काफी अहम माने जा रहे विधेयकों को लेकर सत्तापक्ष में चिंता साफ है। विपक्ष ने साफ संकेत दिया है कि अगर सरकार ने नरम रुख नहीं अपनाया तो वह अहम विधेयकों पर पेंच फंसा सकते हैं।

बीमा विधेयक, जीएसटी और भूमि अधिग्रहण विधेयक में संशोधनों को लेकर विपक्ष ने सरकार को किसी तरह का भरोसा देने से इनकार किया है। विपक्ष यह संदेश नहीं देना चाहता कि वह सरकार के बहुमत के आगे बेबस हैं। एक नेता ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान विपक्ष के रुख के चलते सदन नहीं चला लेकिन इसे विपक्ष ने अपने पक्ष में भुनाया। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सदन चलाए।

हालांकि सरकार को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की उम्मीद है। उसे बीमा विधेयक पर कांग्रेस से समर्थन मिलने की आस है। विधेयक को प्रवर समिति में अंतिम रूप देने का प्रयास हो रहा है। जबकि विपक्षी एकजुटता की कोशिश कर रही कांग्रेस ने संकेत दिया है कि अब वह अकेले इस मसले पर फैसला नहीं करेगी। भूमि अधिग्रहण विधेयक में संशोधन को लेकर तो विपक्ष ने अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। माना जा रहा है कि संसद के इस सत्र में इस विधेयक को आगे बढ़ाना सरकार के लिए शायद ही मुमकिन हो।

इसलिए भी फंस रहा पेंच
विपक्ष के एक नेता के मुताबिक यूपीए सरकार में कोरग्रुप के वरिष्ठ नेता व तत्कालीन प्रधानमंत्री विपक्ष से संवाद करते थे, लेकिन मौजूदा पीएम विपक्षी दलों से संवाद नहीं करते। सरकार में नंबर दो गृहमंत्री राजनाथ सिंह संसद में विरोधी दलों को साधने में कोई भूमिका नहीं निभा रहे हैं। वहीं वरिष्ठ मंत्री सुषमा स्वराज भी अहम मुद्दों पर मूक बनी रहती हैं। सदन की रणनीति का ज्यादातर दारोमदार संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू पर ही छोड़ दिया गया है। वित्तमंत्री अरुण जेटली भी कुछ सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

एकजुट विपक्ष तय करेगा मुद्दों पर रुख
नौ विपक्षी दलों ने एक साथ संसद में मोर्चेबंदी करके सरकार को विधेयकों पर घेरने का मन बनाया है। रोज सुबह कांग्रेस, सपा, बसपा, वामदल, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, राजद, जद यू आदि दलों के नेता आपस में रणनीति तय करते हैं। इन्हीं दलों की साझा रणनीति के चलते ही राज्यसभा में प्रधानमंत्री के वक्त्व्य के बावजूद विरोध जारी रखा गया। अब इन दलों ने तय किया है कि वे सरकार को मजबूर करेंगे कि वह विपक्ष को पर्याप्त महत्व दे। हालांकि सरकार इसे मजबूरी की खेमेबंदी बताकर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने ने के लिए प्रतिबद्धता जाहिर कर रही है।

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