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सलमान के विरुद्ध चल रहे मामले ने सरकारी की तोड़ी नींद

फिल्म अभिनेता सलमान खान के विरुद्ध चल रहे हिट एंड रन के केस ने राज्य सरकार को जगा दिया है। सूबे में हिट एंड रन के मामलों के पीड़ितों को आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही। प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश हैं।

परिवहन आयुक्त ने ऐसे मामलों लापरवाही बरतने पर नाखुशी जताई है। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को इस तरह के मामलों में सहायता उपलब्ध कराने का फरमान सुनाया है। राज्य सरकार ने हिट एंड रन के मामलों में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का फैसला कर रखा है। सरकारी आंकड़े कहते हैं कि प्रदेश में दो हजार से ढाई हजार मामले हिट एंड रन से जुड़े हैं। इस वर्ष पहले तीन माह में 559 लोगों की हिट एंड रन में मौत हुई और 625 लोग घायल हुए। लेकिन महज 20 लोगों को ही पूरे प्रदेश में आर्थिक सहायता मिल सकी। 99 फीसदी लोगों को योजना का लाभ नहीं दिया गया। ये स्थिति चालू वर्ष के पहले तीन माह की है। अब तो पूरा साल गुजरने वाला है। परिवहन आयुक्त के रविन्द्र नायक ने इस स्थिति को एआरटीओ दफ्तर के अधिकारियों की प्रशासनिक अक्षमता, असंवेदनशीलता व निष्क्रियता की पराकाष्ठा माना है।
 

 
डीएम स्वयं प्राधिकारी, वे ही देंगे पीड़ितों को मदद
 डीएम को भेजे पत्र में परिवहन आयुक्त ने दलील दी है कि अज्ञात वाहन की ठोकर से मरने वाले लोग ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब होते हैं। उनके परिवार को 25 हजार रुपये की मदद मिलेगी तो उनके जख्मों पर कुछ मरहम लगेगा। डीएम इस योजना के स्वीकृति प्राधिकारी हैं। डीएम को ही योजना का लाभ पात्रों को देना है। इसलिए डीएम परिवहन और एआरटीओ विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर योजना का लाभ पात्रों को दिलाएं। ट्रैफिक पुलिस से भी सहायता ली जाए।
 

 
सरकारी वाहनों से होने वाली मौतों पर भी मदद नहीं
 हिट एंड रन से जुड़े मामलों में अज्ञात वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं में 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता का प्रावधान है। वहीं किसी लोकसेवा यान जिसमें रोडवेज की बसें भी शामिल हैं। इनसे दुर्घटना होती है तो मृतक के परिजनों को परिवहन विभाग की ओर से 40 हजार रुपये की सहायता दी जाती है। मगर अफसोस पूरे प्रदेश में सरकारी वाहनों से होने वाली मौतों के मामलों में 2 से 5 प्रतिशत लोगों को ही आर्थिक मदद का लाभ दिलाया जा रहा है।
 

 
एआरटीओ विभाग नहीं, डीएम को करना है सारा काम?
  उधर परिवहन आयुक्त की नाराजगी के सवाल पर तीन दिन पूर्व मैनपुरी से तबादला होकर बनारस भेजे गए एआरटीओ राजेश केसरवानी का कहना है कि इस तरह के मामलों की मजिस्ट्रेटी जांच होती है। डीएम ही सक्षम अधिकारी हैं। डीएम स्तर से ही पीड़ितों की फाइल तैयार होगी, जांच होगी और उन्हें मदद दिलाई जाएगी।


परिवहन आयुक्त का पत्र मिला है। इस संबंध में एडीएम और एआरटीओ को तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। हिट एंड रन से जुड़े मामलों में नियमानुसार पीड़ितों को सरकारी मदद दिलाई जाएगी।
सूर्यप्रकाश मिश्र डीएम, मैनपुरी
 
फोटो डीएम--एसपी मिश्र।

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