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रियल एस्टेट पर लगाम से ही रुकेगा काला धन

नोएडा प्राधिकरण के एक अफसर के घर में मिली बेशुमार संपत्ति और हाल ही में हुए एक स्टिंग ऑपरेशन में यह बात सामने आई कि किस तरह जमीन-जायदाद के धंधे में लगी कंपनियां काले धन को सफेद बनाने का काम करती हैं। यह काला धन ही है,  जिसकी वजह से देश भर में जमीन-जायदाद के दाम हमेशा आसमान छूते रहते हैं और अपने घर का सपना उन लोगों से दूर हो जाता है,  जिनके पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं है। एक सर्वे के अनुसार,  इस समय देश में लगभग एक करोड़ फ्लैट खाली पड़े हैं। केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र,  मुंबई और इससे सटे हुए क्षेत्रों में करीब 30 लाख फ्लैट अपने रहने वालों का इंतजार कर रहे हैं। आज दिल्ली से सौ किलोमीटर की दूरी तक आपको सिर्फ इमारतें ही दिखती हैं। इसकी सिर्फ एक वजह है,  इस कारोबार में काले धन का बोलबाला।

आम तौर पर रियल स्टेट कारोबार की तेज विकास दर में महत्वपूर्ण भूमिका और इससे पैदा होने वाले रोजगार की बात सोचकर बाकी चीजों की अनदेखी कर दी जाती है। हालांकि,  इस कारोबार की तेज विकास दर सिर्फ इतना ही बताती है कि देश में काले धन की विकास दर कितनी तेज है। जहां तक रोजगार की बात है,  तो इस क्षेत्र में रोजगार ज्यादातर अस्थायी होते हैं। फिर रोजगार की बात करते समय हमें यह भी ध्यान देना चाहिए कि जिन खेतों को उजाड़कर शहर बसाए जा रहे हैं,  उनके उजाड़े जाने से बहुत सारे लोग बेरोजगार हो जाते हैं। जो परिवार कृषि और पशुपालन के जरिये पलते थे,  उनके ज्यादातर सदस्य आज बेरोजगार हैं। इनको मुआवजा तो मिला,  लेकिन वे इस स्थिति में नहीं थे कि उस मुआवजे का इस्तेमाल रोजगार के पक्के साधन तैयार करने में कर सकें।

काले धन की बहुतायत के कारण मकानों की कीमत इतनी ज्यादा हो चुकी है कि सीमित मासिक आय वाले इनको खरीद पाने की हैसियत नहीं रखते। घर दरअसल अब घर नहीं रहे,  बल्कि काले धन ने उनको सटोरियों के निवेश का सबसे अच्छा विकल्प बना दिया है। इस कारोबार में लगाया गया धन शेयर बाजार और सोने में निवेश की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ रहा है। यह क्षेत्र इतना आकर्षक बन गया है कि दुनिया भर के निवेशक इसमें पैसा लगाने को तैयार बैठे हैं।

एक अनुमान के अनुसार,  देश में आने वाले विदेशी निवेश का 38 फीसदी हिस्सा जमीन-जायदाद में ही जा रहा है। काले धन के बोलबाले के कारण ही यह कारोबार घपलों-घोटालों का केंद्र भी बन गया है। तमाम कोशिशों के बावजूद सरकार इस क्षेत्र के लिए नियामक संस्था आज तक नहीं बना सकी है। इस समय विदेश में जमा काले धन से भी ज्यादा बड़ी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि देश के भीतर काले धन का उत्पादन न हो और उनको खपाने की सारी व्यवस्थाओं को खत्म करते हुए नई पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए,  चाहे वह धन रियल एस्टेट में खपाया जा रहा हो या विदेश में। 
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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  • Web Title:रियल एस्टेट पर लगाम से ही रुकेगा काला धन